menu-icon
India Daily

30 सेकंड में 14,000 फीट नीचे आ गया था फ्लाईदुबई का विमान, इन हालातों में क्या करता है पायलट?

फ्लाईदुबई की दुबई तेल अवीव उड़ान सऊदी अरब के ऊपर करीब आधे मिनट में लगभग 14,000 फीट नीचे गिरी. ब्लूमबर्ग के मुताबिक विमान आवाज की गति के करीब पहुंच गया था.

reepu
Edited By: Reepu Kumari
30 सेकंड में 14,000 फीट नीचे आ गया था फ्लाईदुबई का विमान, इन हालातों में क्या करता है पायलट?
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: सोचिए, आप हजारों फीट की ऊंचाई पर हैं और अचानक विमान का अगला हिस्सा नीचे झुक जाता है. फ्लाईदुबई की दुबई तेल अवीव उड़ान में यात्रियों ने कुछ ऐसा ही झेला. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब के ऊपर विमान करीब आधे मिनट में लगभग 14,000 फीट नीचे आ गया. आरोप है कि इससे पहले को पायलट ने कैप्टन पर चाकू से हमला किया था.

रिपोर्ट के मुताबिक गिरते वक्त विमान आवाज की गति के करीब पहुंच गया था. हालांकि सार्वजनिक फ्लाइट डेटा से यह साफ नहीं होता कि वह इसके कितने करीब था. यात्रियों और क्रू ने हालात संभाले और बोइंग 737 मैक्स 8 तबूक में उतरा, पर उसका रडर क्षतिग्रस्त था. आइए आसान भाषा में समझें कि ऐसी तेज डुबकी में विमान के साथ क्या होता है.

आवाज की रफ्तार के पास पहुंचने पर क्या होता है?

ऊंचाई पर विमान की रफ्तार मैक नंबर में नापी जाती है, यानी आवाज की गति से तुलना. मैक 1 का मतलब आवाज की गति है. विमान उस तक पहुंचने से पहले ही असर महसूस करने लगता है, क्योंकि पंख के ऊपर बहती हवा पहले ही उस गति को छू लेती है. वहां शॉक वेव बनती है. रफ्तार बढ़ने पर यह मजबूत होती जाती है और पंख की सतह से हवा का बहाव टूटने लगता है.

कंपन और कंट्रोल खोने का खतरा

एफएए की हैंडबुक के अनुसार विमानों की दो रफ्तार सीमाएं होती हैं. कम ऊंचाई पर वीएमओ लागू होता है, जबकि ऊपर एमएमओ, जहां ठंडी हवा में आवाज की गति कम हो जाती है. एमएमओ पार होने पर तेज झटके लग सकते हैं और नियंत्रण छूटने का खतरा रहता है. कभी लिफ्ट बदलने से विमान की नाक नीचे झुकती है, जिसे 'मैक टक' कहते हैं. हालात बिगड़ें, तो पायलट के पास विमान को संभालने लायक नियंत्रण नहीं बचता.

तेज डुबकी विमान के ढांचे पर कैसे असर डालती है?

अचानक नाक नीचे झुकने से जी फोर्स कुछ पल के लिए शून्य से नीचे जा सकता है. ऐसे में ढीला सामान छत की ओर तैरने लगता है. फिर विमान को ऊपर खींचने पर जी फोर्स बढ़ता है और पहले से तनाव झेल रहे ढांचे पर और दबाव पड़ता है. खासकर पूंछ सबसे ज्यादा जोखिम में रहती है, क्योंकि तेज रफ्तार में रडर के बड़े या बार-बार हिलने से वह अपनी डिजाइन क्षमता से ज्यादा बोझ झेल सकती है. 

विमान कितना झेल सकते हैं?

अमेरिकी नियमों के तहत हर नए यात्री विमान की डिजाइन डाइव स्पीड उसकी संचालन सीमा से ऊपर रखी जाती है. इसकी गणना ऐसे हालात मानकर होती है, जिनमें विमान 7.5 डिग्री नाक नीचे झुककर 20 सेकंड तक चलता रहे. ढांचा सामान्य रफ्तार पर कम से कम 2.5 जी और माइनस 1 जी झेलने लायक होना चाहिए. इन सीमाओं के ऊपर 50 प्रतिशत सुरक्षा मार्जिन जोड़ा जाता है, जिसे ढांचे को कम से कम तीन सेकंड झेलना होता है. यूरोप के नियामक ईएएसए के नियम भी ऐसे ही हैं.