नई दिल्ली: फ्रांस एक बार फिर बच्चों को डिजिटल दुनिया के दुष्प्रभावों से बचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है. सरकार ने एक मसौदा कानून तैयार किया है, जिसके तहत 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच पर रोक लगाई जाएगी.
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के समर्थन से यह प्रस्ताव सितंबर 2026 तक लागू करने की योजना है. इसका मकसद किशोरों में बढ़ते स्क्रीन टाइम, साइबर उत्पीड़न और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर नियंत्रण पाना है.
सरकारी मसौदे में कहा गया है कि कई शोध और रिपोर्ट यह साबित कर चुके हैं कि अत्यधिक डिजिटल स्क्रीन उपयोग से किशोरों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है. बच्चों को अनुचित कंटेंट देखने, ऑनलाइन उत्पीड़न का शिकार होने और नींद की दिनचर्या बिगड़ने का खतरा अधिक रहता है. सरकार का मानना है कि समय रहते सख्त नियम बनाना आवश्यक हो गया है.
मसौदा कानून में दो प्रमुख अनुच्छेद शामिल हैं. पहला अनुच्छेद 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया सेवाएं उपलब्ध कराना गैरकानूनी घोषित करता है. दूसरा अनुच्छेद माध्यमिक स्कूलों में मोबाइल फोन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात करता है. सरकार का कहना है कि इससे बच्चों का ध्यान पढ़ाई और सामाजिक गतिविधियों पर केंद्रित रहेगा.
फ्रांस में 2018 से प्री-स्कूल और मिडिल स्कूलों में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लागू है, लेकिन इसका सख्ती से पालन नहीं हो पाया. इसके अलावा 2023 में 'डिजिटल लीगल एज' 15 वर्ष तय करने वाला कानून यूरोपीय संघ के नियमों के चलते अटक गया था. यही वजह है कि सरकार इस बार अधिक ठोस और प्रभावी कानून लाने की कोशिश कर रही है.
राष्ट्रपति मैक्रों पहले ही कह चुके हैं कि नाबालिगों की डिजिटल सुरक्षा उनकी सरकार की प्राथमिकता है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कानूनों और यूरोपीय संघ के नियमों के कारण इस तरह के प्रतिबंधों को लागू करना आसान नहीं है. सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि नया कानून यूरोपीय ढांचे के अनुरूप हो.
फ्रांस की सीनेट ने हाल ही में किशोरों को अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बचाने के लिए एक पहल का समर्थन किया है. इसमें 13 से 16 वर्ष के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाने से पहले माता-पिता की अनुमति अनिवार्य करने का प्रस्ताव है. अब यह मसौदा नेशनल असेंबली के पास भेजा गया है, जहां मंजूरी मिलने के बाद ही यह कानून बन सकेगा.