नोबेल शांति पुरस्कार के ऐलान में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है, और उससे ठीक पहले ट्रंप के एक बयान ने सबका ध्यान खींच लिया है. बुधवार को उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसे काम किए हैं जो किसी और ने कभी नहीं किए. ट्रंप के शब्दों में, वे डींग नहीं हांक रहे, बस हकीकत बता रहे हैं. उनका कहना है कि शायद ही किसी राष्ट्रपति ने कोई युद्ध सुलझाया हो, जबकि उन्होंने आठ सुलझा दिए.
दिलचस्प बात यह रही कि ट्रंप ने साफ तौर पर यह नहीं कहा कि वे यह सब नोबेल की दावेदारी के लिए कह रहे हैं. फिर भी बयान का समय अपने आप में बहुत कुछ कहता है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि शांति की उनकी कोशिशें अभी थमी नहीं हैं और वे जल्द ही एक और संघर्ष खत्म करा सकते हैं. यानी घोषणा से पहले उन्होंने अपनी उपलब्धियां एक बार फिर दुनिया के सामने रख दीं.
नोबेल की यह चाहत ट्रंप के लिए नई नहीं है. पहले कार्यकाल में उन्होंने उत्तर कोरिया के साथ अपनी कूटनीतिक कोशिशों की ओर ध्यान दिलाया था. साल 2018 में नॉर्वे के दो राजनेताओं ने कहा कि किम जोंग के साथ हुई शिखर वार्ता के बाद उन्होंने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया है.
अगले साल ट्रंप ने बताया कि जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने उन्हें इस पुरस्कार के लिए नामांकित किया था, क्योंकि उन्होंने उत्तर कोरिया के साथ तनाव घटाने की कोशिश की थी. आबे ने इस नामांकन की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की. 2020 के चुनाव प्रचार में भी ट्रंप ने अपनी दावेदारी पर जोर दिया.
राष्ट्रपति बनने की दूसरी पारी में ट्रंप ने इस मुद्दे पर खुलकर बोलना शुरू किया. फरवरी 2025 में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें यह पुरस्कार कभी नहीं दिया जाएगा, जबकि वे इसके हकदार हैं. ट्रंप के मुताबिक उन्हें यह सम्मान चार या पांच बार मिल जाना चाहिए था.
ट्रंप की दावेदारी का आधार विवाद सुलझाने में उनकी भूमिका है. वे बार-बार भारत और पाकिस्तान, इजरायल और ईरान, कंबोडिया और थाईलैंड, सर्बिया और कोसोवो, रवांडा और कांगो, मिस्र और इथियोपिया, तथा आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच तनाव कम कराने में अपना योगदान गिनाते रहे हैं.
इजरायल, पाकिस्तान और कंबोडिया के नेताओं ने ट्रंप को 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया है. लेकिन सार्वजनिक रूप से घोषित नामांकन और आधिकारिक नोबेल प्रक्रिया में बड़ा फर्क है. नॉर्वेजियन नोबेल समिति किसी भी व्यक्तिगत नामांकन की सार्वजनिक पुष्टि नहीं करती है.