नई दिल्ली: वाशिंगटन में इन दिनों ईरान युद्ध की चर्चा गरम है. राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की टीम अब इस महंगे संघर्ष का खर्चा उठाने के नए रास्ते तलाश रही है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लीविट ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में खुलासा किया कि ट्रंप खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात से मदद की अपील कर सकते हैं. साथ ही उन्होंने ईरान के साथ चल रही निजी वार्ता को सकारात्मक बताया. यह बयान ऐसे समय आया है जब युद्ध की लागत अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर बोझ बन रही है.
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब लीविट से पूछा गया कि क्या अरब देश युद्ध की लागत में हिस्सा बांटेंगे, तो उन्होंने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा कि वह राष्ट्रपति से आगे नहीं बढ़ना चाहतीं. लेकिन उन्होंने साफ किया कि यह विचार ट्रंप के मन में है. लीवित ने कहा, 'मुझे लगता है कि राष्ट्रपति इस बारे में काफी उत्सुक होंगे और उनसे ऐसा करने के लिए कहेंगे. यह एक ऐसा विचार है जिसके बारे में आप उनसे और ज्यादा सुनेंगे.' गल्फ वॉर के समय की तरह दोबारा अरब देशों की मदद की उम्मीद जताई जा रही है.
लीविट ने ईरान की दोहरी नीति पर भी रोशनी डाली. उन्होंने बताया कि तेहरान सार्वजनिक रूप से जो कुछ भी कह रहा है, वह अमेरिकी अधिकारियों से निजी तौर पर कही गई बातों से काफी अलग है. ईरान ने कुछ अहम बिंदुओं पर निजी वार्ता में सहमति जताई है. व्हाइट हाउस का कहना है कि सार्वजनिक दावों और झूठी खबरों के बावजूद बातचीत जारी है और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है.
प्रेस सचिव ने जोर देकर कहा कि ईरानी शासन की ओर से सार्वजनिक रूप से किए जा रहे तमाम दावे निजी चर्चाओं से बहुत भिन्न हैं. फिर भी वाशिंगटन तेहरान के साथ संवाद बनाए हुए है. लीविट के मुताबिक, ये निजी बातचीत संघर्ष को जल्द समाप्त करने में मददगार साबित हो रही हैं. ट्रंप प्रशासन इस पूरे मामले को सावधानी से संभाल रहा है ताकि कोई गलतफहमी न फैले.
व्हाइट हाउस का मानना है कि ईरान के साथ बातचीत अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है. लीविट ने संकेत दिया कि अगर सब ठीक रहा तो संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है. ट्रंप इस युद्ध को लंबा खींचने के बजाय किफायती और प्रभावी तरीके से निपटाना चाहते हैं. इसी क्रम में खाड़ी देशों से वित्तीय सहयोग की संभावना तलाशी जा रही है.
लीविट ने स्पष्ट किया कि ट्रंप खुद इस मुद्दे पर विस्तार से बोलेंगे. अभी वह राष्ट्रपति के विचार से आगे नहीं जाना चाहतीं. लेकिन साफ है कि अमेरिका युद्ध की लागत अकेले नहीं उठाना चाहता. खाड़ी देशों की भूमिका एक बार फिर चर्चा में है. पूरी स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आने वाले दिनों में और अपडेट्स सामने आ सकते हैं.