नई दिल्ली: यरुशलम में पाम संडे के मौके पर एक अभूतपूर्व स्थिति सामने आई, जब इजरायली पुलिस ने कैथोलिक धर्मगुरुओं को Church of the Holy Sepulchre में प्रवेश से रोक दिया. यह वही स्थान है, जहां ईसाई मान्यता के अनुसार यीशु मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था.
मिडिल ईस्ट में तनाव और लगातार मिसाइल हमलों के बीच शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों को बंद रखा गया है, जिससे धार्मिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा है.
इजरायली पुलिस ने स्पष्ट किया कि पाम संडे पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति सुरक्षा कारणों से नहीं दी गई. उनका कहना है कि पुरानी बस्ती की संकरी गलियों में आपातकालीन सेवाओं की पहुंच सीमित है और पर्याप्त बंकर भी उपलब्ध नहीं हैं. हालांकि, कैथोलिक चर्च ने इस फैसले को 'अत्यधिक और अनुचित' बताया और कहा कि यह धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है.
पाम संडे ईसाइयों के लिए बेहद पवित्र दिन माना जाता है, जो यीशु के यरुशलम आगमन की याद दिलाता है. आमतौर पर इस दिन हजारों श्रद्धालु जुलूस निकालते हैं. लेकिन इस बार हालात अलग रहे. चर्च प्रशासन ने पहले ही जुलूस रद्द कर दिया था और सीमित संख्या में कार्यक्रम आयोजित कर रहा था. फिर भी वरिष्ठ धर्मगुरुओं को प्रवेश से रोकना अभूतपूर्व माना जा रहा है.
इस घटना पर इटली की प्रधानमंत्री ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने इसे न केवल धार्मिक समुदाय बल्कि पूरी मानवता के लिए अपमान बताया. वहीं पोप Pope लियो XIV ने भी मिडिल ईस्ट के ईसाइयों के लिए प्रार्थना करते हुए कहा कि वे इस समय अपने पवित्र अनुष्ठान पूरी तरह नहीं कर पा रहे हैं.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इस फैसले के पीछे कोई दुर्भावना नहीं थी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि ईस्टर से पहले धार्मिक नेताओं को सीमित रूप में पूजा की अनुमति देने की योजना बनाई जा रही है.
फिलहाल, वेस्टर्न वॉल सहित कई धार्मिक स्थलों पर भी सीमित संख्या में लोगों को ही प्रवेश दिया जा रहा है. पश्चिमी दीवार, जो यहूदियों के लिए प्रार्थना करने का सबसे पवित्र स्थल है. सुरक्षा कारणों से ज्यादातर बंद है, लेकिन अधिकारी प्लाजा से सटे एक बंद क्षेत्र में एक समय में अधिकतम 50 लोगों को प्रार्थना करने की अनुमति दे रहे हैं.