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India Daily

'....सैनिकों को जलाकर राख कर देंगे', जमीनी युद्ध को लेकर ईरान की अमेरिका को दो टूक चेतावनी

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है. खर्ग द्वीप पर संभावित अमेरिकी जमीनी हमले की खबरों के बाद ईरानी स्पीकर ने स्पष्ट किया कि उनकी सेना पलटवार के लिए पूरी तरह तैयार है और वॉशिंगटन के क्षेत्रीय सहयोगियों को भी इसकी भारी कीमत चुकानी होगी.

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'....सैनिकों को जलाकर राख कर देंगे', जमीनी युद्ध को लेकर ईरान की अमेरिका को दो टूक चेतावनी
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में पिछले एक महीने से जारी भीषण संघर्ष अब एक नए और अधिक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद अब जंग के और अधिक विस्तार की आशंका गहरा गई है. ताजा खबरों के अनुसार, अमेरिका अब ईरान के भीतर अपने जमीनी सैनिकों को उतारने की रणनीति बना रहा है, जिसके जवाब में ईरान ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है.

गुप्त योजना प्रमुख अमेरिकी समाचार पत्र 'द वॉशिंगटन पोस्ट' ने रक्षा अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि पेंटागन ईरान में हफ्तों तक चलने वाले 'सीमित जमीनी अभियानों' की रूपरेखा तैयार कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सैनिक विशेष अभियानों और पारंपरिक पैदल सेना के जरिए ईरान के रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण खर्ग द्वीप और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तटीय ठिकानों पर छापेमारी कर सकते हैं. मिडिल ईस्ट में पहले ही हजारों अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की जा चुकी है, जिससे इन अटकलों को और बल मिला है.

अमेरिका की इन तैयारियों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर कालिबफ ने रविवार को वॉशिंगटन को सीधी चेतावनी दी. कालिबफ ने कहा कि ईरानी सेनाएं जमीन पर अमेरिकी सैनिकों के उतरने का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं ताकि उन्हें "जलाकर राख" किया जा सके. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि हमारी मिसाइलें तैनात हैं और गोलाबारी जारी है. कालिबफ ने चेतावनी दी कि यदि ईरानी सरजमीं पर कोई भी दुस्साहस हुआ, तो न केवल अमेरिकी सैनिकों को बल्कि उनके क्षेत्रीय सहयोगियों को भी ऐसी सजा दी जाएगी जिसे वे कभी भूल नहीं पाएंगे.

पाकिस्तान के जरिए आई 15-सूत्रीय योजना पर तंज 

कालिबफ ने पिछले हफ्ते पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को सौंपी गई अमेरिका की 15-सूत्रीय योजना को ट्रंप प्रशासन की महज 'इच्छाएं' करार दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका इस योजना के जरिए वह सब हासिल करना चाहता है, जिसे वह अपनी ताकत के दम पर पाने में विफल रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान कभी आत्मसमर्पण नहीं करेगा और अपमान स्वीकार करने का सवाल ही पैदा नहीं होता.

छापेमारी और आईईडी (IED) का खतरा 

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिकी सेना जमीनी अभियान शुरू करती है, तो उन्हें ईरानी ड्रोन, घातक मिसाइलों और जमीन पर बिछाए गए तात्कालिक विस्फोटक उपकरणों (IEDs) के गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है. फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें खर्ग द्वीप और होर्मुज की ओर टिकी हैं, जहां एक छोटी सी चिंगारी भी वैश्विक तबाही का कारण बन सकती है.