पश्चिम एशिया में जारी महायुद्ध अब एक बेहद खतरनाक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शांति वार्ता का दावा कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पेंटागन मध्य पूर्व में तेजी से अपने सैनिकों की फौज उतार रहा है.
एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ईरान पर जमीनी हमले के लिए 10,000 सैनिक भेजने की रणनीति पर विचार कर रहा है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने खुद पुष्टि की है कि शनिवार को 3,500 मरीन सैनिक और नाविक मध्य पूर्व पहुंच चुके हैं. अमेरिका के इस कदम ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और भारत जैसे देशों की चिंताओं को चरम पर पहुंचा दिया है, क्योंकि ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद किए जाने से दुनिया भर में हाहाकार मचा हुआ है.
अमेरिकी सेना की इस आक्रामक घेराबंदी पर ईरान ने बेहद खौफनाक पलटवार किया है. ईरान के राष्ट्रीय अखबार ने अपने पहले पन्ने पर अमेरिकी सैनिकों की तस्वीर छापते हुए खुली चेतावनी दी है- "नरक में आपका स्वागत है. जो भी अमेरिकी सैनिक ईरान की धरती पर कदम रखेगा, वह सिर्फ ताबूत में ही वापस जाएगा." कूटनीतिक मोर्चे पर पेरिस में G7 बैठक के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका बिना जमीनी हमले के भी अपने लक्ष्य हासिल कर सकता है.
U.S. Sailors and Marines aboard USS Tripoli (LHA 7) arrived in the U.S. Central Command area of responsibility, March 27. The America-class amphibious assault ship serves as the flagship for the Tripoli Amphibious Ready Group / 31st Marine Expeditionary Unit composed of about… pic.twitter.com/JFWiPBbkd2
— U.S. Central Command (@CENTCOM) March 28, 2026
हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सैनिकों की इस विशाल मौजूदगी से राष्ट्रपति ट्रंप को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कई सैन्य विकल्प मिल जाते हैं. रूबियो ने यह भी दावा किया कि यह युद्ध महीनों तक नहीं खिंचेगा, बल्कि हफ्तों में खत्म हो जाएगा.
युद्ध के मैदान से इतर, अमेरिका एक साथ कूटनीतिक दबाव की रणनीति भी अपना रहा है. ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने मियामी में एक फोरम के दौरान उम्मीद जताई कि ईरान इसी हफ्ते अमेरिका की 15-सूत्रीय शांति योजना पर जवाब देगा और बातचीत की मेज पर आएगा.
दबाव को और अधिक बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोलने के लिए दी गई समय सीमा को 6 अप्रैल तक बढ़ा दिया है. अमेरिका का साफ संदेश है कि अगर ईरान ने यह जलमार्ग नहीं खोला, तो उसके पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी हमलों का सामना करना पड़ेगा.