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India Daily

'उसे वोट देना हराम', हेफाजत-ए-इस्लाम ने जमात-ए-इस्लामी के खिलाफ खोला मोर्चा

बांग्लादेश संसदीय चुनाव में अब महज कुछ दिनों का समय बचा है. उससे पहले हेफाजत-ए-इस्लाम बांग्लादेश ने बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के खिलाफ बोलेते हुए 'जिहाद' का ऐलान किया है.

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Edited By: Shanu Sharma
'उसे वोट देना हराम', हेफाजत-ए-इस्लाम ने जमात-ए-इस्लामी के खिलाफ खोला मोर्चा
Courtesy: X (@Drsr_Official)

नई दिल्ली: बांग्लादेश की पार्टी हेफाजत-ए-इस्लाम ने बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. पार्टी प्रमुख अल्लामा शाह मुहिबुल्लाह बाबुनगरी ने जमात के खिलाफ जिहाद का ऐलान किया है. साथ ही चेतावनी दी है कि मुसलमानों के लिए उसे वोट देना 'हराम 'है.

बांग्लादेशी अखबार के मुताबिक हेफाज़त-ए-इस्लाम बांग्लादेश के प्रमुख अल्लामा शाह मुहिबुल्लाह बाबुनगरी ने BNP उम्मीदवार के समर्थन की घोषणा करते हुए कहा कि मेरे लिए यह चुनाव नहीं है, यह जमात के खिलाफ एक जिहाद है.

बाबुनगरी ने लगाए गंभीर आरोप

बाबुनगरी ने कहा जमात-ए-इस्लामी पर इस्लाम की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि हमें इस झूठी ताकत के उदय को रोकने के लिए एकजुट होना चाहिए. बांग्लादेशी अखबार के रिपोर्ट के मुताबिक जमात को वोट देना सभी मुसलमानों के लिए हराम है और किसी भी तरह से इसकी इजाज़त नहीं है. उन्होंने कहा कि हमारे जमात-ए-इस्लामी के साथ मौलिक और सैद्धांतिक मतभेद हैं. वे धर्म की सही व्याख्या नहीं करते हैं. इसलिए, हमें इस झूठी ताकत के उदय को रोकने के लिए एकजुट होना चाहिए.

बांग्लादेश में हुए एक सर्वेक्षण में पता चला कि जमात-ए-इस्लामी पहले से कहीं ज़्यादा मजबूत होकर उभर सकती है. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के बाद  जमात-ए-इस्लामी का नाम है. अपनी मां के निधन के बाद BNP का नेतृत्व अब तारिक रहमान कर रहे हैं. उन्होंने फाजत के साथ संपर्क तेज कर दिया है. जबकि हेफाजत ने पहले बिना किसी आपत्ति के जमात सहित गठबंधन में काम किया था, अब उसने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है.

हेफाजत-ए-इस्लाम का इतिहास

हेफाजत के अमीर बाबूनगरी की जमात के खिलाफ टिप्पणियां महीनों बाद आई हैं, जब उन्होंने इसे एक पाखंडी इस्लामी पार्टी कहा था. बाबूनगरी ने कहा था कि जमात-ए-इस्लामी एक पाखंडी इस्लामी पार्टी है. यह असली नहीं है. यह सिर्फ़ मैं नहीं कह रहा हूं. हमारे सम्मानित बड़ों ने भी ऐसा कहा है.

जमात-ए-इस्लामी मौदूदी के इस्लाम को मानती है, जबकि हम मदीना के इस्लाम को मानते हैं. मौदूदी के इस्लाम का पालन करने से किसी का विश्वास खतरे में पड़ जाता है. वहीं हेफाजत-ए-इस्लाम, बांग्लादेश स्थित एक सुन्नी देवबंदी इस्लामी वकालत समूह है. यह कौमी मदरसों के विशाल नेटवर्क पर आधारित है, जिसका मुख्यालय चट्टोग्राम में अल-जामियातुल अहलिया दारुल उलूम मोइनुल इस्लाम मदरसे में है. यह खुद को एक गैर-राजनीतिक एडवोकेसी ग्रुप बताता है.