साल 2024 का लोकसभा चुनाव खत्म भी हो चुका है. एनडीए गठबंधन पूर्ण बहुमत पाकर सरकार बना चुका है. तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने शपथ ग्रहण कर ली है. साथ ही मंत्री परिषद का भी शपथ ग्रहण हो चुका है. अब सब की नजर 18वीं लोकसभा के गठन पर है. नई लोकसभा बनने पर कई तरह के संसदीय काम रहते हैं. जैसे विपक्ष के नेता का चुनाव, कौन सा नेता किस स्थान पर बैठेगा लेकिन इस सब से पहले होता है प्रोटेम स्पीकर का चुनाव. आइए समझते हैं कि प्रोटेम स्पीकर का पद क्या है, इसका चुनाव कैसे होता है और इस पद पर बैठने वाले व्यक्ति की क्या जिम्मेदारियां रहती हैं.
संविधान के अनुसार, नई लोकसभा के गठन के तुरंत बाद, नई लोकसभा की बैठक के पहले ही स्पीकर का पद खाली हो जाता है. ऐसे में स्पीकर की जिम्मेदारी सदन के ही एक सदस्य को उठानी पड़ती है. जिसे राष्ट्रपति द्वारा प्रोटेम स्पीकर के रूप में नियुक्त किया जाता है. प्रोटेम स्पीकर ही लोकसभा की पहली बैठक की अध्यक्षता करता है.
सरकार बनते ही राज्य सभा और लोकसभा के कार्यकाल को मद्दे नजर रखते हुए. वरिष्ठ सदस्यों की सूची तैयार की जाती है. जिसे प्रधानमंत्री के हाथ में सौप दिया जाता है. उसके बाद पीएम उनमें से एक सदस्य को चुनते हैं. साथ ही तीन ऐसे सदस्य को चुना जाता है. जिनके सामने बाकी के मंत्री शपथ ले सकें. प्रधानमंत्री की मंजूरी के बाद, इन पदों के लिए चुने गए सदस्यों की सहमति भी ली जाती है. यह काम संसदीय कार्य मंत्री करता है. इसके बाद, संसदीय कार्य मंत्री राष्ट्रपति को एक नोट सौंपते हुए. प्रोटेम स्पीकर और अन्य तीन सदस्यों की नियुक्ति पर उनकी मंजूरी मांगता है.
राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद प्रोटेम स्पीकर और तीन सदस्यों को शपथ दिलाने की तैयारियों का काम शुरू हो जाता है.
प्रोटेम स्पीकर को शपथ राष्ट्रपति द्वारा दिलाई जाती है. यह शपथ ग्रहण राष्ट्रपति भवन में होता है. कार्यक्रम की व्यवस्था और लोगों को निमंत्रण भेजने का काम राष्ट्रपति सचिवालय का होता है. उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और संसदीय कार्य मंत्री जैसे गणमान्य लोग इस दौरान राष्ट्रपति भवन में मौजूद रहते हैं. बाकी के तीन सदस्यों को प्रोटेम स्पीकर द्वारा शपथ दिलवाई जाती है. इन तीन सदस्यों का शपथ ग्रहण सदन में करवाया जाता है.
प्रोटेम स्पीकर एक अस्थायी स्पीकर होता है जिसे संसद और राज्य विधानसभाओं में कार्यवाही संचालित करने के लिए सीमित समय के लिए नियुक्त किया जाता है. लोकसभा की पहली बैठक की अध्यक्षता यही करता है. संचालन के अलावा सदन में चुनकर आए नए सदस्यों को शपथ दिलाने का काम प्रोटेम स्पीकर का होता है.
इस काम में स्पीकर को राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त तीन सदस्यों की मदद भी मिलती है. साथ ही संसद के स्पीकर और डिप्टी स्पीकर का चुनाव भी प्रोटेम स्पीकर ही करवाता है. जैसे ही स्पीकर का चुनाव पूर्ण हो जाता है. वैसे ही प्रोटेम स्पीकर का कार्यकाल समाप्त हो जाता है.