लोकसभा के मानसून सत्र के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ बड़ी कार्यवाही की गई है. महिला सांसदों पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी और सदन की गरिमा प्रभावित करने के आरोप में उन्हें शेष मानसून सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया. यह फैसला लोकसभा में पेश किए गए प्रस्ताव पर ध्वनिमत से लिया गया. इस घटनाक्रम के बाद संसद में राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है.
बुधवार को लोकसभा की कार्यवाही दोपहर दो बजे दोबारा शुरू होने पर पीठासीन अधिकारी कृष्ण प्रसाद टेनेटी ने सांसदों की शिकायत का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि कल्याण बनर्जी की टिप्पणियां सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं थीं. इसके बाद केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने निलंबन का प्रस्ताव सदन के सामने रखा.
विपक्ष की नारेबाजी के बीच सदन में प्रस्ताव पर ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गई. प्रस्ताव पारित होते ही पीठासीन अधिकारी ने कल्याण बनर्जी को लोकसभा परिसर छोड़ने का निर्देश दिया. यह निलंबन मानसून सत्र की शेष अवधि तक प्रभावी रहेगा, जो 13 अगस्त तक निर्धारित है.
इस कार्यवाही से पहले सदन स्थगित होने के दौरान कल्याण बनर्जी की कुछ महिला सांसदों के साथ तीखी बहस हुई थी. इस विवाद में मिताली बाग, शताब्दी रॉय और काकोली घोष दस्तीदार शामिल थीं. हालांकि विवाद की शुरुआत किस वजह से हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
घटना के बाद संबंधित सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर मामले की शिकायत की. सूत्रों के अनुसार अध्यक्ष ने पूरे घटनाक्रम पर लिखित शिकायत देने को कहा. इसके बाद शिकायत के आधार पर सदन में आगे की प्रक्रिया शुरू की गई.
कल्याण बनर्जी के निलंबन के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. संसद में सदस्यों के आचरण और मर्यादा को लेकर फिर चर्चा शुरू हो गई है. अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि इस घटनाक्रम पर संबंधित दलों की आगे क्या प्रतिक्रिया सामने आती है.