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बर्गर विवाद से बिखरी CJP! जानिए कैसे हुई कॉकरोच जनता पार्टी में पहली बड़ी टूट?

NEET पेपर लीक विवाद को लेकर छात्रों के आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनी कॉकरोच जनता पार्टी अब अपने पहले बड़े आंतरिक संकट से गुजर रही है. संसद मार्च के दौरान वायरल हुए एक वीडियो के बाद पार्टी ने अपने मुख्य प्रवक्ता विजेता दहिया को पद और प्राथमिक सदस्यता से हटा दिया है.

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Edited By: Shanu Sharma
बर्गर विवाद से बिखरी CJP! जानिए कैसे हुई कॉकरोच जनता पार्टी में पहली बड़ी टूट?
Courtesy: X (@BeingPolitical1)

NEET और विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के विरोध में देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी पहली बार बड़े संगठनात्मक संकट का सामना कर रही है. सोशल मीडिया पर व्यंग्य के रूप में शुरू हुआ यह अभियान कुछ ही समय में हजारों छात्रों की आवाज बन गया, लेकिन अब इसके शीर्ष नेतृत्व में मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं. 

संसद मार्च के दौरान सामने आए एक विवादित वीडियो ने संगठन के भीतर ऐसी हलचल मचाई कि पार्टी को अपने प्रमुख चेहरे के खिलाफ कड़ा कदम उठाना पड़ा.

डिजिटल व्यंग्य से शुरू हुआ आंदोलन

CJP की शुरुआत महाराष्ट्र के एक्टिविस्ट अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पैरोडी अकाउंट के जरिए की थी. उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर व्यवस्था का ध्यान आकर्षित करना था. धीरे-धीरे इस अभियान से छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार और युवा नेता जुड़ते गए. सौरव दास और आशुतोष रांका जैसे नाम संगठन की रणनीति और संवाद का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे.

इसी दौरान हरियाणा के युवा नेता और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर विजेता दहिया भी इस आंदोलन से जुड़े. युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता और आक्रामक शैली के कारण उन्हें जल्द ही सीजीपी का प्रमुख प्रवक्ता बनाया गया. 21 जुलाई 2026 को CJP ने चलो संसद मार्च का आह्वान किया. जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हुए. प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग की और भीड़ को रोकने के लिए वाटर कैनन तथा आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया. इस दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी घायल हुए और कई छात्रों को हिरासत में भी लिया गया.

संसद मार्च के दौरान बढ़ा विवाद

इसी हंगामे के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें विजेता दहिया एक मॉल स्थित बर्गर आउटलेट में भोजन करते नजर आए. यह वीडियो उस समय सामने आया जब प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे थे. वीडियो वायरल होने के बाद कई छात्रों और समर्थकों ने इसे आंदोलन की भावना के विपरीत बताते हुए नाराजगी जताई.

वीडियो पर सफाई देने के बजाय विजेता दहिया ने एक और वीडियो जारी करते हुए कहा कि लंबे समय से लगातार काम करने के बाद भोजन करना गलत नहीं है. हालांकि उनका यह बयान विवाद को शांत करने के बजाय और बढ़ा गया. सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं और संगठन के भीतर भी असहमति बढ़ गई.

नेतृत्व ने लिया सख्त फैसला

विवाद बढ़ने के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और मुख्य प्रवक्ता सौरव दास की ओर से आधिकारिक बयान जारी किया गया. इसमें विजेता दहिया को मुख्य प्रवक्ता पद और प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से हटाने की घोषणा की गई. संगठन ने कहा कि छात्र आंदोलन त्याग और संघर्ष पर आधारित है तथा किसी भी जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति से संवेदनशील और जवाबदेह व्यवहार की अपेक्षा की जाती है. इसी के साथ अभिजीत दिपके ने यह भी घोषणा की कि भविष्य में फिलहाल संसद मार्च जैसे कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे. उनका कहना था कि संगठन छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और उन्हें अनावश्यक हिंसा या पुलिस कार्रवाई के जोखिम में नहीं डालना चाहता. इस घटनाक्रम ने CJP के सामने संगठनात्मक एकता बनाए रखने की नई चुनौती खड़ी कर दी है.