संसद परिसर के बाहर बुधवार को विपक्षी दलों के सांसद केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और नारेबाजी कर रहे थे. इसी दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक ने राजनीतिक गलियारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार और उनकी बेटी तथा सांसद सुप्रिया सुले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की.
बैठक की सामने आई तस्वीरों में प्रधानमंत्री और शरद पवार बातचीत के दौरान सहज और मुस्कुराते नजर आए. एक अन्य तस्वीर में प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवेश द्वार पर प्रधानमंत्री स्वयं शरद पवार का स्वागत करते दिखाई दिए, जिससे इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गईं.
शरद पवार ने मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपा. इसमें किसानों की समस्याओं, सिंचाई परियोजनाओं और कृषि क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों का उल्लेख किया गया. माना जा रहा है कि पवार ने कृषि क्षेत्र की चुनौतियों पर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया. यह बैठक ऐसे समय हुई है जब केंद्र सरकार संसद में परिसीमन विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए व्यापक समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है.
सरकार की रणनीति में एनसीपी (एसपी) के आठ सांसदों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पार्टी पहले ही संकेत दे चुकी है कि यदि सभी संसदीय सीटों में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का लिखित आश्वासन दिया जाता है तो वह विधेयक पर सकारात्मक रुख अपना सकती है. हाल ही में सुप्रिया सुले ने भी कहा था कि लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही आगे की चर्चा संभव होगी.
बैठक के बाद महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. लंबे समय से ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि एनसीपी के दोनों गुटों के बीच फिर से एकजुट होने की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं. राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, विभिन्न नेताओं के बीच हालिया संपर्कों ने इन चर्चाओं को और बल दिया है.
बताया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी का रुख स्पष्ट है कि किसी भी संभावित राजनीतिक साझेदारी से पहले एनसीपी के दोनों गुटों का आपसी मतभेद समाप्त होना जरूरी है. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी किसी एक गुट या व्यक्तिगत नेता को अलग से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल करने के पक्ष में नहीं है. ऐसे राजनीतिक माहौल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शरद पवार की यह मुलाकात केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे आने वाले दिनों की संभावित राजनीतिक दिशा के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है.