नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों और सांसदों को संबोधित करते हुए सत्र को ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सत्र सकारात्मक, सार्थक और उत्पादक रहेगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में बहस तर्क और तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि शोर-शराबे के सहारे. उन्होंने विपक्ष से भी सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग देने की अपील की.
प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे सक्रिय मानसून देश के लिए लाभकारी होता है, उसी तरह सक्रिय और उत्पादक मानसून सत्र भी देशहित में होता है. उन्होंने कहा कि यदि दोनों ही सकारात्मक ढंग से काम करें तो देश और समाज का कल्याण होता है. उन्होंने प्रार्थना व्यक्त की कि मानसून भी सक्रिय रहे और संसद का सत्र भी पूरी तरह उत्पादक साबित हो.
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने पिछले एक महीने के दौरान भारत की विभिन्न उपलब्धियों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि देश ने राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और अंतरिक्ष के क्षेत्र में कई ऐसी सफलताएं हासिल की हैं, जिन पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए. उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारतीय युवाओं और स्टार्टअप की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि यह देश के युवाओं की असीम क्षमता और बढ़ते आत्मविश्वास का प्रमाण है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत लगातार नई तकनीक और आधुनिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है. उन्होंने राजस्थान में देश को समर्पित की गई बड़ी ऑयल रिफाइनरी, तीसरे सेमीकंडक्टर संयंत्र और हाल ही में शुरू की गई ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन का उल्लेख किया. उनके अनुसार भारत की हाइड्रोजन ट्रेन दुनिया की सबसे शक्तिशाली इंजन वाली और सबसे लंबी ट्रेनों में शामिल है, जो देश की तकनीकी प्रगति को दर्शाती है.
संसद में होने वाली चर्चाओं पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां तर्क और तथ्य मौजूद हों, वहां शोर-शराबे की कोई आवश्यकता नहीं होती. यदि किसी के पास मजबूत तथ्य और ठोस तर्क हैं तो अपनी बात रखने के लिए आवाज ऊंची करने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि संसद का दायित्व हर पक्ष की बात सुनना और लोकतांत्रिक संवाद को आगे बढ़ाना है.
मानसून सत्र के दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर सकती है. इनमें आयकर संशोधन विधेयक, सर्वोच्च न्यायालय संशोधन विधेयक, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संशोधन विधेयक, जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक, सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम विकास संशोधन विधेयक, विदेशी अंशदान संशोधन विधेयक और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक शामिल हैं. इन प्रस्तावित विधेयकों पर संसद में विस्तृत चर्चा होने की संभावना है.
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के अनुसार संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक चलेगा. इस दौरान कुल 19 बैठकें होंगी. सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर व्यापक चर्चा के साथ कई महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में प्रस्तुत किया जाएगा.