केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के करीब दो घंटे बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया साझा की. हालांकि यह पोस्ट इस्तीफे या NEET-UG पेपर लीक विवाद पर नहीं थी. प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने को “हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण” बताया.
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि सारनाथ भगवान बुद्ध से जुड़ा एक पवित्र स्थल है, जहां से करुणा, शांति और ज्ञान का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचा. उन्होंने कहा कि यूनेस्को की मान्यता भारत की समृद्ध सभ्यतागत और आध्यात्मिक विरासत का सम्मान है तथा इससे दुनिया भर के लोग सारनाथ आकर भगवान बुद्ध के आदर्शों से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे.
A proud moment for every Indian!
— Narendra Modi (@narendramodi) July 25, 2026
Delighted that Sarnath in Uttar Pradesh has been inscribed on the UNESCO World Heritage List.
Sarnath has a close association with Lord Buddha, whose timeless message of wisdom, compassion and harmony inspires the world.
This recognition… https://t.co/KkdMOg6g0d
धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG पेपर लीक प्रकरण की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया. पिछले कई दिनों से छात्र संगठनों और विभिन्न विपक्षी दलों के समर्थन से बड़े स्तर पर प्रदर्शन चल रहे थे. प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा शामिल था. सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और अन्य मांगों पर भी सहमति जताई, जिसके बाद आंदोलन फिलहाल स्थगित हो गया.
प्रधान के इस्तीफे के बाद भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके कार्यकाल की सराहना की. नेताओं ने नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के प्रभावी क्रियान्वयन, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और भारतीय परंपरा आधारित शिक्षा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका का उल्लेख किया. कई केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने सोशल मीडिया पर उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा केवल शुरुआत है और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े बड़े सवाल अब भी बाकी हैं. वहीं आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने इसे जनदबाव की जीत बताया, लेकिन कहा कि केवल एक इस्तीफे से पूरी जवाबदेही तय नहीं हो जाती. उनका कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच और व्यापक सुधार ही युवाओं का विश्वास बहाल कर सकते हैं.