कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के आंदोलन को बड़ी सफलता मिलने के बाद उनके माता-पिता कैमरे के सामने भावुक हो गए. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आते ही दिपके की मां अनीता दिपके की आंखों से आंसू छलक पड़े. उन्होंने इसे अपने बेटे की मेहनत और दृढ़ संकल्प की जीत बताते हुए कहा कि कई रातें उन्होंने चिंता में जागकर बिताईं. उनका कहना था कि बेटे ने कठिन परिस्थितियों में आंदोलन जारी रखा और आखिरकार उसकी मांग पूरी हुई.
अनीता दिपके ने बताया कि आंदोलन के दौरान अभिजीत को मच्छरों के बीच रातें बितानी पड़ीं और उन्हें टायफाइड भी हो गया था. इसके बावजूद उन्होंने पीछे हटने से इनकार कर दिया. अभिजीत ने भी कहा कि बीमारी उनकी लड़ाई को कमजोर नहीं कर सकती. पिछले महीने से दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन का नेतृत्व करते हुए उन्होंने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा था.
#WATCH | Chhatrapati Sambhajinagar, Maharashtra | Parents of Cockroach Janta Party's Founding President Abhijeet Dipke get emotional after Union Minister Dharmendra Pradhan resigns. pic.twitter.com/LkxTiKmLf6
— ANI (@ANI) July 25, 2026
दिपके की मां ने बताया कि शुरुआत में उनका बेटा अकेला था, जिससे पूरा परिवार चिंतित रहता था. बाद में बड़ी संख्या में छात्रों के समर्थन से उन्हें कुछ राहत मिली. उन्होंने जयपुर की घटना को याद करते हुए कहा कि जब अभिजीत के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट हुई तो पूरा परिवार टूट गया था. इसके अलावा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान उन पर स्याही फेंके जाने की घटना ने भी परिवार की चिंता बढ़ा दी थी.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सीजेपी ने अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी. संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्रियों और संगठन के प्रतिनिधियों ने बताया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी पुलिस मामलों को वापस लेने और नियमानुसार अधिकतम मुआवजा देने पर सहमति जताई है. इसके साथ ही आंदोलन की प्रमुख मांगें स्वीकार होने के बाद प्रदर्शन खत्म कर दिया गया.
यह आंदोलन कथित परीक्षा अनियमितताओं और नीट पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर शुरू हुआ था. समय के साथ इसमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए और इसे व्यापक समर्थन मिला. आंदोलन की सफलता के बाद अभिजीत दिपके की मां ने कहा कि अब परिवार बेटे का स्वागत मिठाइयां बांटकर करेगा. उनका मानना है कि यह केवल उनके बेटे की नहीं, बल्कि उन सभी छात्रों की जीत है जिन्होंने इस आंदोलन में हिस्सा लिया.