नई दिल्ली: भारतीय सेना ने 7 मई को पाकिस्तान पर पहलगाम हमले के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया. भारतीय सेना ने सीमा के अंदर घुसकर आतंकी ठिकाने ध्वस्त कर दिए. आतंकी हमले के जवाब में चलाए गए इस ऑपरेशन में 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए.
जिसके बाद भारत–पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव बढ़ने पर भारत ने इस्लामाबाद के सैन्य ढांचे नष्ट कर दिए. साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान पर दबाव बढ़ गया. जिसके बाद 10 मई को युद्धविराम समझौते के बाद दोनों देशों में चल रहा तनाव खत्म हुआ.
ANI को दिए इंटरव्यू में एडमिरल त्रिपाठी ने कहा- 'ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आक्रामक रुख और युद्धक विमानवाहक समूह की तैनाती की तत्काल कार्रवाई ने पाकिस्तानी नौसेना को अपने बंदरगाहों या मकरान तट के पास रहने के लिए मजबूर कर दिया.' एडमिरल त्रिपाठी ने यह भी दोहराया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है और हकीकत में अभी समाप्त नहीं हुआ. उन्होंने कहा-'यह एक ऐसा ऑपरेशन है जो अभी भी जारी है.'
ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान पर वित्तीय दबाव पड़ा है, क्योंकि युद्ध के बाद बड़ी संख्या में व्यापारिक जहाज पाकिस्तान की तरफ यात्रा करने से बचते हैं. इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि पाकिस्तान जाने वाले जहाजों के लिए बीमा की लागत भी बढ़ गई है.
मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में दिए अपने भाषण के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- 'ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सशस्त्र बलों ने संतुलित और बिना किसी उकसावे वाली प्रतिक्रिया के साथ पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया. लेकिन पड़ोसी देश की नापाक हरकतों के कारण सीमा पर स्थिति सामान्य नहीं होने दी.'
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर नागरिक–सैन्य एकीकरण का एक उल्लेखनीय उदाहरण है, जहां प्रशासनिक मशीनरी ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा करने और जनता का विश्वास बनाने के लिए सशस्त्र बलों के साथ निर्बाध रूप से काम किया.