नई दिल्ली: NEET पेपर लीक विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग लगातार तेज होती जा रही है. जंतर-मंतर पर छात्र संगठनों और विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है. अब चर्चा सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि जवाबदेही और राजनीतिक जिम्मेदारी तक पहुंच गई है. ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या शिक्षा से जुड़े विवादों में पहले कभी किसी शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दिया है. भारत और दुनिया के कई उदाहरण बताते हैं कि कुछ मामलों में मंत्रियों ने पद छोड़ा, जबकि कई बड़े विवादों के बावजूद सरकारों ने उन्हें पद पर बनाए रखा.
भारत में वर्ष 2012 में जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन शिक्षा मंत्री पीरजादा मोहम्मद सईद ने अपने बेटे से जुड़े परीक्षा अनियमितता मामले में क्राइम ब्रांच की जांच रिपोर्ट आने के बाद इस्तीफा दिया था. वहीं, 1981 में गोवा के शिक्षा मंत्री फ्रांसिस्को सार्डिन्हा ने परीक्षा अंकों में कथित गड़बड़ी को लेकर छात्रों के विरोध के बाद पद छोड़ दिया था.
जर्मनी में वर्ष 2013 में शिक्षा मंत्री एनेट शावन ने शोध में साहित्यिक चोरी का मामला सामने आने के बाद इस्तीफा दिया. वहीं, नॉर्वे में 2024 में अनुसंधान एवं उच्च शिक्षा मंत्री सैंड्रा बोर्च ने अपनी मास्टर थीसिस में नकल के आरोप स्वीकार करते हुए पद छोड़ दिया. दोनों मामलों में व्यक्तिगत जवाबदेही विवाद का प्रमुख कारण बनी.
कई देशों में बड़े शिक्षा विवादों के बावजूद मंत्रियों ने इस्तीफा नहीं दिया. ब्रिटेन में 2020 के ए-लेवल एल्गोरिदम विवाद के दौरान शिक्षा सचिव गैविन विलियमसन पर भारी दबाव बना, लेकिन उन्होंने पद नहीं छोड़ा. इसी तरह 2023 में स्कूल भवनों से जुड़े आरएएसी संकट के बावजूद शिक्षा सचिव गिलियन कीगन अपने पद पर बनी रहीं.
भारत में कई परीक्षा विवादों के दौरान शिक्षा मंत्री पद पर बने रहे. पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने 2021 में स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया था. उनका इस्तीफा किसी परीक्षा विवाद से जुड़ा नहीं था. वहीं, NEET-UG जैसे मामलों में जांच एजेंसियों और परीक्षा संस्थाओं पर कार्रवाई हुई, लेकिन मंत्री पद पर बने रहे.
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी मंत्री का इस्तीफा केवल जनविरोध या परीक्षा विवाद से तय नहीं होता. आमतौर पर व्यक्तिगत आरोप, भ्रष्टाचार, नकल, साहित्यिक चोरी या गंभीर प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मामलों में इस्तीफे की नौबत आती है. किसी भी सरकार का अंतिम फैसला राजनीतिक परिस्थितियों, जांच की दिशा और सार्वजनिक दबाव पर निर्भर करता है.