राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को मुंबई में आयोजित इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (IIMUN) की 15वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में नई पीढ़ी को लेकर बड़ा बयान दिया. करीब 2,000 Gen Z और Gen Alpha युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें आज की युवा पीढ़ी पर पूरा भरोसा है. भागवत ने कहा, 'मैं Gen-Z पर आंख बंद करके भरोसा करूंगा.' उनके अनुसार किसी व्यवस्था में सुधार की मांग को देशविरोध नहीं माना जाना चाहिए.
मोहन भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम है. उन्होंने कहा कि यदि युवा किसी समस्या को लेकर आवाज उठा रहे हैं तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए. उनके मुताबिक पिछली पीढ़ियां बड़े-बुजुर्गों से सवाल नहीं करती थीं, लेकिन आज की Gen Z और Gen Alpha तार्किक जवाब चाहती हैं. उन्होंने कहा कि वे कभी यह नहीं कहेंगे कि युवाओं को विरोध नहीं करना चाहिए, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद के जरिए समाधान तलाशना जरूरी है.
दिल्ली में हाल में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का उल्लेख करते हुए भागवत ने कहा कि उनके पास इस घटना की पूरी और प्रमाणिक जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि उपलब्ध जानकारी के आधार पर विश्वास करना पड़े तो वे Gen-Z पर भरोसा करेंगे, लेकिन बिना तथ्य जाने किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि विरोध करने वाले युवाओं को केवल सवाल पूछने के कारण देशविरोधी कहना उचित नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कुछ रिपोर्टों में असामाजिक तत्वों की मौजूदगी की बात सामने आई है, जिसकी पुष्टि जरूरी है.
RSS प्रमुख ने कहा कि शिक्षा को व्यवसाय नहीं बनाया जाना चाहिए और इसे समाज की साझा जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए. उन्होंने शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाकर कुल बजट का 6 प्रतिशत करने की मांग का समर्थन किया. साथ ही उन्होंने कहा कि केवल कानून बनाकर सोशल मीडिया पर फैल रही गलत सूचनाओं की समस्या का समाधान नहीं होगा. लोगों की सोच बदलने, जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार अपनाने और जानकारी को प्रमाणिक स्रोतों से परखने की जरूरत है.
भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में नागरिकों को सरकार के फैसलों के साथ खड़ा होना चाहिए, लेकिन स्थायी नफरत किसी समस्या का समाधान नहीं है. उन्होंने कहा कि मानवता सबसे ऊपर होनी चाहिए. LGBTQ समुदाय पर उन्होंने कहा कि वे भी समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और समाज में उनके लिए स्थान होना चाहिए. हालांकि, उन्होंने समान-लिंग विवाह का समर्थन नहीं किया. उनका कहना था कि विवाह एक सामाजिक संस्था है, लेकिन समाज को ऐसा ढांचा विकसित करना चाहिए, जिसमें समान-लिंग साथियों (Same-sex companionship) को उचित मान्यता और स्थान मिल सके.