राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में नई पीढ़ी को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि यदि Gen Z किसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रही है तो उसे देशविरोधी नहीं कहा जाना चाहिए. उनके अनुसार यह देश की अपनी नई पीढ़ी है, जो हर विषय पर तार्किक जवाब चाहती है और उसकी सोच पिछली पीढ़ियों से अलग है.
VIDEO | Mumbai: On being asked about protests and concerns that protesters may be labelled "anti-national", RSS chief Mohan Bhagwat, while addressing Gen Z and Gen Alpha, says, "...I want to make it clear that if Gen Z engages in any agitation, they are not anti-national. They… pic.twitter.com/XWU9coSnTg
— Press Trust of India (@PTI_News) August 6, 2026Also Read
भागवत ने कहा कि जब उनकी पीढ़ी युवावस्था में थी, तब बड़े-बुजुर्गों की बात बिना सवाल किए मान ली जाती थी. लेकिन आज की Gen Z हर बात का तर्क जानना चाहती है. उन्होंने कहा कि यह बदलाव स्वाभाविक है और इसे नकारात्मक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए. उनके मुताबिक Gen Z और Gen Alpha मौजूदा पीढ़ी की तुलना में अधिक ईमानदार हैं तथा देशभक्ति और समाज सेवा की सच्ची भावना उन्हें आकर्षित करती है.
#WATCH | Mumbai, Maharashtra: On recent students' protest and dialogues, RSS chief Mohan Bhagwat says, "...In democracy, protest is also a method to have consensus. Lot of views come together and a consensus is evolved after discussion, that discussion may happen through… pic.twitter.com/NYItiwEUXN
— ANI (@ANI) August 6, 2026
दिल्ली में पिछले महीने छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि उनके पास इस बात का जवाब नहीं है कि लाठीचार्ज और पैलेट गन का इस्तेमाल क्यों किया गया. उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के पीछे की परिस्थितियों और कारणों का गंभीरता से अध्ययन किया जाना चाहिए. हालांकि, उन्होंने इस मामले में किसी पर प्रत्यक्ष आरोप नहीं लगाया.
RSS प्रमुख ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में केवल एक-दो बदलाव पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि व्यापक सुधारों की आवश्यकता है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षा को व्यवसाय नहीं बनाया जाना चाहिए और हर व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होनी चाहिए. उन्होंने स्कूलों और कॉलेजों की फीस संरचना की समीक्षा करने तथा शिक्षा को अधिक सुलभ और किफायती बनाने की जरूरत बताई.
मोहन भागवत ने शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाकर कुल बजट का 6 प्रतिशत करने की मांग का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी है. स्कूलों के विकास, शिक्षकों के प्रशिक्षण और बेहतर शिक्षण व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. उनका कहना था कि शिक्षा का उद्देश्य समाज को सक्षम बनाना होना चाहिए, न कि इसे केवल व्यवसाय का माध्यम बनाया जाए.