नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया वीडियो को कुछ समय के लिए हटाए जाने का मामला अब राजनीतिक और तकनीकी दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है. संसदीय समिति की कड़ी नाराजगी और 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद मेटा ने तेजी दिखाते हुए 24 घंटे के भीतर भारत सरकार से औपचारिक माफी मांग ली. कंपनी ने इस पूरे घटनाक्रम को तकनीकी त्रुटि बताया और भरोसा दिलाया कि ऐसी गलती दोबारा न हो, इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे.
मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान ने आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर कंपनी की ओर से खेद व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट पर लगी रोक तकनीकी गलती का परिणाम थी. कंपनी ने स्वीकार किया कि यह निर्णय सही नहीं था और इसके लिए औपचारिक रूप से माफी मांगी गई है.
इससे पहले संचार और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों को 48 घंटे के भीतर भारत आने का निर्देश दिया था. समिति ने साफ संकेत दिया था कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है. भारत मेटा के सबसे बड़े बाजारों में शामिल है, इसलिए इस घटनाक्रम पर कंपनी ने तुरंत प्रतिक्रिया दी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एक वर्टिकल वीडियो साझा किया था. कुछ समय बाद यह वीडियो दोनों प्लेटफॉर्म से हट गया. बाद में मेटा ने इसे बहाल कर दिया और कहा कि यह तकनीकी गड़बड़ी के कारण हुआ था. हालांकि, सरकार को कंपनी का शुरुआती स्पष्टीकरण पर्याप्त नहीं लगा.
संसदीय समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा था कि यदि मेटा माफी नहीं मांगता, तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली 'सेफ हार्बर' सुरक्षा पर विचार किया जा सकता है. उनका कहना था कि किसी प्रधानमंत्री का वीडियो हटाना केवल तकनीकी मामला नहीं माना जा सकता.
इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े मामलों को गंभीरता से देख रही है. मेटा की ओर से माफी मांगने के बाद विवाद फिलहाल शांत होता दिख रहा है, लेकिन इस घटना ने सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही और कंटेंट मॉडरेशन की प्रक्रिया पर नई बहस शुरू कर दी है.