नई दिल्ली: तमिलनाडु की तमिलगा वेत्री कझगम सरकार ने बुधवार को अपना पहला बजट पेश करते हुए कई बड़े चुनावी वादों को अमल में लाने का रोडमैप सामने रखा. वित्त मंत्री एन. मैरी विल्सन ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए महिलाओं, छात्रों, युवाओं, बुजुर्गों और अल्पसंख्यकों के लिए नई योजनाओं का एलान किया. सरकार ने शिक्षा, डिजिटल कौशल, खेल, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक विकास को प्राथमिकता देते हुए 2031 तक राज्य को 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य भी दोहराया.
बजट की सबसे बड़ी घोषणा 'अन्नन सीर थिट्टम' रही. इस योजना के तहत पात्र दुल्हनों को विवाह के समय 8 ग्राम का सोने का सिक्का और एक रेशमी साड़ी दी जाएगी. इसके लिए सरकार ने 812 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. वहीं सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं के लिए सोने की अंगूठी योजना पर 560 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
सरकार ने स्कूली शिक्षा के लिए 44,527 करोड़ रुपये और उच्च शिक्षा के लिए 8,393 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. 3,734 स्कूलों के आधुनिकीकरण के लिए 300 करोड़ रुपये रखे गए हैं. 'सुपर क्लीन, सुपर कैंपस' अभियान के पहले चरण में 10,000 स्कूल शामिल होंगे. कॉलेज छात्रों के लिए लैपटॉप योजना पर 2,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि नए आईटीआई और विशेष लॉ कॉलेज की भी घोषणा हुई है.
सरकार ने वर्ष 2031 तक इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक संस्थानों और आईटीआई के 50,000 छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा है. खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य में 10 ओलंपिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे. सरकार का कहना है कि इन पहलों से युवाओं को आधुनिक कौशल और बेहतर अवसर मिलेंगे.
बजट में अल्पसंख्यक छात्रों की छात्रवृत्ति जारी रखने का फैसला किया गया है. हज सब्सिडी 25,000 रुपये से बढ़ाकर 35,000 रुपये कर दी गई है. ईसाई और मुस्लिम महिला संगठनों को आर्थिक सहायता देने के साथ मुस्लिम समुदाय के लिए कब्रिस्तानों के विकास पर भी धनराशि आवंटित की गई है. इसके अलावा 'ड्रग-फ्री TN' योजना के लिए 7 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं.
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार 2031 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है. उन्होंने पिछली सरकार पर राज्य का कर्ज बढ़ाने का आरोप लगाया. साथ ही सरकारी टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने का दावा किया. शराब बनाने वाली इकाइयों पर विशेष शुल्क लगाकर करीब 1,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व जुटाने की भी योजना बनाई गई है.