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फेफड़ों और दिल में चोट… ऐसे हुई RG Kar अस्पताल की लिफ्ट में फंसे व्यक्ति की मौत

कोलकाता के आरजी कर हॉस्पिटल में एक दुखद घटना हुई, जिसमें अरूप की मौत तब हुई जब वो लिफ्ट और फर्श के बीच फंस गए. चलिए जानते हैं क्या है यह पूरा मामला.

Shilpa Shrivastava
फेफड़ों और दिल में चोट… ऐसे हुई RG Kar अस्पताल की लिफ्ट में फंसे व्यक्ति की मौत
Courtesy: Pinterest

दम दम: शुक्रवार कोलकाता में एक दुखद घटना हुआ, जिसमें यहां स्थित आरजी कर मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में एक व्यक्ति की मौत हो गई. दम दम इलाके के रहने वाले 40 साल के अरूप बंदोपाध्याय नाम का एक व्यक्ति अपनी पत्नी और छोटे बेटे के साथ अस्पताल गए थे. उनके छोटे बेटे का पैर टूट गया था. इनके बेटे को ट्रॉमा केयर यूनिट में इलाज की जरूरत थी. 

सुबह लगभग 5 बजे उसका परिवार लिफ्ट में चढ़ा. फिर बीच में अचानक से ही लिफ्ट खराब हो गई और बीच में फंस गई. इस खराबी के चलते वो एक घंटे से ज्यादा समय तक अंदर ही फंसे रहे. उनकी मदद करने के लिए वहां कोई एलीवेटर ऑपरेटर या अस्पताल का कर्मचारी मौजूद नहीं था. जब लिफ्ट हिली या गलत तरीके से चली, तो परिवार घबरा गया.

लिफ्ट खुलने पर दीवार और फर्श के बीच फंसे अरूप:

परिवार ने बताया कि जब मदद उन तक पहुंची तो अरूप बाहर निकलने की कोशिश करने लगे, लेकिन वो लिफ्ट और दीवार या फर्श के बीच फंस गए. उन्हें गंभीर चोटें आईं. उनकी पत्नी और बेटा सुरक्षित थे, लेकिन अरूप बुरी तरह घायल हो गए थे. इसके बाद डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

अरूप की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि उनकी पसलियां, हाथ और पैर की हड्डियां टूट गई थीं. सिर्फ इतना ही नहीं, उनके फेफड़ों, दिल और लिवर में भी चोटें आई थीं. कुछ रिपोर्टों के अनुसार, डर और स्ट्रेस के चलते उन्हें दिल का दौरा पड़ा था. वहीं, कुछ अन्य रिपोर्ट्स में फंसने और दबने से जो उन्हें चोटें लगी थीं, उससे उनकी मौत हो गई थी. 

अरूप के पिता ने की शिकायत दर्ज: 

अरूप के पिता अमल बंदोपाध्याय ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई. टाटा पुलिस स्टेशन ने लापरवाही से हुई मौत की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है. जिन लोगों से पूछताछ की गई है, उनमें लिफ्ट ऑपरेटर और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं. इन्हें हिरासत में ले लिया गया है. पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि क्या सुरक्षा नियमों की अनदेखी की गई थी और क्या लिफ्ट का रखरखाव ठीक से किया गया था.

अस्पताल के मेडितल, सुप्रीटेंडेंट, सप्तार्शी चटोपाध्याय ने यह स्वीकार किया है कि यह एक प्रशासनिक चूक थी. हादसे के समय वहां कोई ऑपरेटर या सहायक मौजूद नहीं था. उन्होंने कहा कि लिफ्ट कभी-कभी चलती थी लेकिन परिवार ने दावा किया है कि जब अरूप बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, तो लिफ्ट अचानक फिर से चल पड़ी. इसी वजह से उन्हें काफी चोटें आईं और उनकी मौत हो गई.