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होर्मुज बंद होने के बावजूद भारत ने कैसे किया गैस का मैनेजमेंट? जानें

होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित होने के बाद भारत सप्लाई संतुलित की बड़े संकट को टाल दिया. चलिए जानते हैं भारत अपनी गैस की जरूरतों को कैसे पूरा कर रहा है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
होर्मुज बंद होने के बावजूद भारत ने कैसे किया गैस का मैनेजमेंट? जानें
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: जब से मध्य-पूर्व में संघर्ष शुरू हुआ है, तब से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला रास्ता प्रभावित रहा है. जिसके वजह से भारत को होने वाली गैस की सप्लाई अब पहले की तरह नहीं हो रही है लेकिन जब होर्मुज से सप्लाई उपलब्ध नहीं है, तब भारत अपनी गैस की जरूरतों को कैसे पूरा कर रहा है?

भारत के लिए गैस का आयात करना बहुत जरूरी है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर रहता है. गैस की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा भारत आयात के जरिए पूरा करता है. इस मात्रा का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आम तौर पर इसी रणनीतिक समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है, जिसमें कतर और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE जैसे बड़े सप्लायर शामिल हैं. 

कैसी है अभी की स्थिति?

हालांकि असल स्थिति उतनी गंभीर नहीं निकली जितनी शुरू में आशंका थी. भारत ने तेजी से अपनी सप्लाई चेन को फिर से व्यवस्थित किया और वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख करके, संभावित ऊर्जा संकट को काफी हद तक काबू में कर लिया.

संतुलन कैसे हुआ बहाल?

रिपोर्ट के अनुसार मार्च महीने में होर्मुज मार्ग में रुकावट आने के ठीक बाद भारत के LNG आयात में गिरावट देखी गई. इस गिरावट का मुख्य कारण यह था कि उस दौरान कतर और UAE से लगभग कोई नई खेप नहीं पहुंची थी. इस झटके के बावजूद भारत ने यह सुनिश्चित किया कि सप्लाई में कोई रुकावट न आए. इसके बजाय उसने तुरंत नए सप्लायरों की ओर रुख किया. 

इस दौर में भारत ने ओमान, संयुक्त राज्य अमेरिका, नाइजीरिया और अंगोला से संपर्क किया. इन देशों से आयात बढ़ाकर भारत सप्लाई में आई कमी की काफी हद तक भरपाई करने में सफल रहा.

नए सप्लाई हब के तौर कौन आया सामने?

सबसे अहम बात यह रही कि ओमान भारत के सबसे भरोसेमंद वैकल्पिक सप्लायर के तौर पर उभरा. ऐसा इसलिए है क्योंकि ओमान के निर्यात मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर नहीं हैं. इसके बजाय खेप अरब सागर के रास्ते भारत तक पहुंचाई जाती है. 

इसी तरह संयुक्त राज्य अमेरिका से भी LNG की सप्लाई बढ़ी, जिससे भारत के लिए एक स्थिर भले ही लंबी दूरी वाली सप्लाई बनी रही. नाइजीरिया और अंगोला ने भी अतिरिक्त मात्रा में गैस उपलब्ध कराकर सप्लाई में आई कमी को पूरा करने में योगदान दिया.

होर्मुज के बंद होने का क्या है कारण?

मार्च और अप्रैल के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण, इन दो महीनों की अवधि में कतर से केवल 0.06 मिलियन टन और संयुक्त अरब अमीरात से 0.13 मिलियन टन LNG का आयात किया गया. ओमान ने मार्च और अप्रैल के दौरान अपनी आपूर्ति में भारी वृद्धि देखी, जो बढ़कर 1.2 मिलियन टन हो गई, जिसका औसत 0.6 मिलियन टन प्रति माह रहा.