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केजरीवाल की जीत या कोर्ट की हार? जज स्वर्णकांता शर्मा ने खुद को दिल्ली शराब नीति मामले से किया अलग

दिल्ली शराब नीति मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा कर रही थीं. सुनवाई के दौरान आप ने जज के खिलाफ एक रिफ्यूजल याचिका दाखिल कर मांग की थी कि जज खुद को इस केस से अलग कर लें.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
केजरीवाल की जीत या कोर्ट की हार? जज स्वर्णकांता शर्मा ने खुद को दिल्ली शराब नीति मामले से किया अलग
Courtesy: @YdbRaj7382

दिल्ली हाईकोर्ट की जज स्वर्णकांता ने दिल्ली शराब नीति मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है. हालांकि कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के पांच बड़े नेताओं के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी है.

आप नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने जज स्वर्णकांता के खिलाफ सोशल मीडिया पर जानबूझकर एक कैंपेन चलाकर उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश की और अदालत की साख को नुकसान पहुंचाया. जस्टिस शर्मा ने आज अपने आदेश में स्पष्ट और बेहद सख्त लहजे में ये बातें कहीं.

बता दें कि दिल्ली शराब नीति मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा कर रही थीं. सुनवाई के दौरान आप ने जज के खिलाफ एक रिफ्यूजल याचिका दाखिल कर मांग की थी कि जज खुद को इस केस से अलग कर लें. पार्टी का कहना था कि जज के इस केस में बने रहने तक उन्हें न्याय मिलने की संभावना कम है. कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई की और अपना आदेश दिया.

खुद को इस केस से अलग करने के फैसले पर जज स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि पक्षपात की किसी भी आशंका से बचने के लिए शराब नीति मामले की सुनवाई अब एक अन्य बेंच करेगी. उन्होंने कहा कि यदि अवमानना की कार्रवाई के बाद भी मैं यह केस जारी रखती हूं तो ये लोग कहेंगे कि मेरी इनसे कोई निजी दुश्मनी है.

जस्टिस शर्मा ने कहा, 'मेरे द्वारा खुद को अलग करने से इनकार करने के बाद अरविंद केजरीवाल ने कानूनी उपायों का सहारा लेने के बजाय मेरी प्रतिष्ठा को नष्ट कर ने की कोशिश की और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में अदालत के अधिकार को कम करने के जानबूझकर किए गए प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है.'

 जस्टिश शर्मा ने कहा कि वह आप नेताओं द्वारा दायर याचिका को खारिज करने के अपने पूर्व आदेश पर कायम हैं और वह उसमें एक भी शब्द नहीं बदलेंगीं. उन्होंने कहा कि उन्होंने संस्था और अपने लिए सही राह चुनी है.

जस्टिस शर्मा ने यह भी कहा कि कानून के तहत अवमानना की कार्रवाई शुरू करने वाला जज मुख्य मामले की सुनवाई जारी नहीं रख सकता. उन्होंने कहा कि अब यह मामला मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाएगा ताकि इसे किसी  अन्य बेंच को सौंपा जा सके.

अरविंद केजरीवाल के अलावा, मनीष सिसौदिया, दुर्गेश पाठक, संजय सिंह, विनय मिश्रा और सौरभ भारद्वाज के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की गई है.

केजरीवाल ने इससे पहले हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए दावा किया था कि जस्टिस शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल वकील हैं.

हालांकि सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उनके कार्यालय से जुड़े कई युवा वकील न्यायाधीशों के बच्चे हैं लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि वे उन अदालती मामलों में पेश होने से बचते हैं जहां इस तरह के विवाद उत्पन्न हो सकते हैं. मेहता ने मामले की सुनवाई जारी रखने का आग्रह किया लेकिन उन्होंने कहा कि अनुशासन के अनुसार मामले को किसी अन्य पीठ को ट्रांसफर करना आवश्यक है.

केजरीवाल ने दी प्रतिक्रिया

वहीं आप प्रमुख केजरीवाल ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए  ट्वीट कर कहा, 'सत्य की जीत हुई है. गांधीजी के सत्याग्रह की फिर एक बार जीत हुई है.'

बता दें कि सीबीआई और ईडी 2021-22 से जुड़े इस शराब नीति मामले में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच कर रहे हैं जिसमें अरविंद केजरीवाल और पार्टी के अन्य नेताओं पर आरोप लगे हैं.