ईरान अमेरिका और इजरायल के बीच लंबे समय से जारी जंग के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा साल 2015 में ईरान के साथ हुए समझौते का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि उस समय न कोई सैन्य कार्रवाई हुई, ना कोई मिसाइल अटैक हुआ और न ही होर्मुज स्ट्रेट बाधित हुआ, प्रशासन ने केवल बातचीत के जरिए ही ईरान के साथ समझौता कर लिया.
'द लेट शो विद स्टीफन कोलबर्ट', में संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) जिसे ईरान परमाणु डील भी कहा जाता है, पर बोलते हुए ओबामा ने कहा कि हमने ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए बड़ी ही सावधानी के साथ यह समझौता किया था.
ओबामा ने कहा, 'हमने बिना मिसाइल दागे यह कर दिखाया'. उन्होंने कहा कि इस समझौते से ईरान के यूरेनियम भंडार में भारी कमी आई. साथ ही उसके यूरेनियम भंडार पर अंतराष्ट्रीय निगरानी व्यवस्था भी बरकार रही. उन्होंने आगे कहा, 'हमने 97% समृद्ध यूरेनियम का हिस्सा निकाल लिया था और वे ऊर्जा के लिए सीमित नागरिक परमाणु कार्यक्रम चलाने में सक्षम रहे.'
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि उस समय इजरायल समेत खुफिया एजेंसियों ने समझौते की प्रभावशीलता का समर्थन किया था. उन्होंने कहा कि मुझे ही नहीं इजरायल एजेंसी को भी लगा कि यह काम कर रहा है. यहां तक की हमारी खुफिया एजेंसियों को भी लगा कि यह काम कर रहा है.
President Obama on Iran: “We pulled it off without firing a missile. We got 97% of their enriched uranium out. There’s no dispute that it worked and we didn’t have to kill a whole bunch of people or shut down the Strait of Hormuz” pic.twitter.com/ELRAVFwW7y
— Marco Foster (@MarcoFoster_) May 13, 2026
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि इस समझौते ने मध्य पूर्व में एक बड़े संघर्ष को टालने में मदद की थी. उन्होंने कहा कि हमें बहुत सारे लोगों को मारने या होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की जरूरत नहीं थी.
JCPOA समझौता ईरान और दुनिया की 6 महाशक्तियों अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन के बीच हुआ था. इसका उद्देश्य प्रतिबंधों में छूट देने के बदले तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना था. इस समझौते के तहत ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार को 98 प्रतिशत तक कम करने पर राजी हुआ था. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय निगरानीकर्ताओं को निगरानी के लिए ईरान के परमाणु सुविधाओं तक पहुंच की अनुमति दी गई थी. हालांकि यह समझौता 2018 तक बना रहा लेकिन जैसे ही डोनाल्ड ट्रंप पहली बार अमेरिका के राष्ट्रपति बने उन्होंने इस समझौते को यह कहते हुए तोड़ दिया कि भयानक और एकतरफा सौदा है.