menu-icon
India Daily

Javed akhtar Event Cancel in kolkata: कोलकाता में जावेद अख्तर का कार्यक्रम हुआ कैंसिल, मुस्लिम संगठनों के विरोध के बाद फैसला

कोलकाता में पश्चिम बंगाल उर्दू अकादमी ने मशहूर गीतकार और कवि जावेद अख्तर के चार दिवसीय मुशायरे को स्थगित कर दिया है. यह कार्यक्रम 31 अगस्त से 3 सितंबर तक कोलकाता में आयोजित होने वाला था, जिसमें जावेद अख्तर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने वाले थे.

antima
Edited By: Antima Pal
Javed akhtar Event Cancel in kolkata: कोलकाता में जावेद अख्तर का कार्यक्रम हुआ कैंसिल, मुस्लिम संगठनों के विरोध के बाद फैसला
Courtesy: social media

Javed akhtar Event Cancel in kolkata: कोलकाता में पश्चिम बंगाल उर्दू अकादमी ने मशहूर गीतकार और कवि जावेद अख्तर के चार दिवसीय मुशायरे को स्थगित कर दिया है. यह कार्यक्रम 31 अगस्त से 3 सितंबर तक कोलकाता में आयोजित होने वाला था, जिसमें जावेद अख्तर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने वाले थे.

अकादमी ने आधिकारिक तौर पर कोई कारण नहीं बताया, लेकिन सचिव नुजहत जैनब ने कहा कि 'कुछ मजबूरी' के कारण कार्यक्रम टाल दिया गया है. नई तारीखों की घोषणा बाद में की जाएगी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि जावेद अख्तर नए कार्यक्रम का हिस्सा होंगे या नहीं.

कोलकाता में जावेद अख्तर का कार्यक्रम हुआ कैंसिल

कई मुस्लिम संगठनों ने जावेद अख्तर के हालिया बयानों पर आपत्ति जताई, जिन्हें उन्होंने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया. जमीयत-ए-उलेमा के राज्य इकाई के महासचिव मुफ्ती अब्दुस सलाम कासमी ने कहा कि अकादमी को ऐसे अतिथि को आमंत्रित करना चाहिए था, जिसने धार्मिक भावनाओं को आहत न किया हो. वहीं वहयाइन फाउंडेशन के मुफ्ती शमाइल नदवी ने जावेद अख्तर की रचनात्मक प्रतिभा की तारीफ की, लेकिन उनके हालिया बयानों को समुदाय की भावनाओं के खिलाफ बताया. उन्होंने अल्पसंख्यक मामलों के विभाग से भविष्य में अतिथि चयन में सावधानी बरतने की मांग की.

मुस्लिम संगठनों के विरोध के बाद फैसला

जावेद अख्तर जो अपनी बेबाक राय और नास्तिकता के लिए जाने जाते हैं, ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों से आलोचना मिलती है, जो उनके लिए सही रास्ते का संकेत है. उन्होंने कोलकाता के प्रति अपने प्रेम को दोहराया और जल्द वहां आने की इच्छा जताई. इस स्थगन की कई लेखकों ने निंदा की है, इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया. लेखिका तसलीमा नसरीन ने सोशल मीडिया पर अकादमी की चुप्पी की आलोचना की और कहा कि कट्टरपंथी ताकतों के सामने झुकने से उनकी हिम्मत बढ़ती है.