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India Daily

होर्मुज की बारूदी सुरंगें भी होंगी बेअसर, भारत ने उतारा दुश्मनों की चुनौती खत्म करने वाला युद्धपोत

भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धपोत 'मछलीपट्टनम' का जलावतरण किया गया. यह जहाज समुद्री सुरंगों, पनडुब्बियों और तटीय सुरक्षा अभियानों में नौसेना की क्षमता को और मजबूत करेगा.

KanhaiyaaZee
होर्मुज की बारूदी सुरंगें भी होंगी बेअसर, भारत ने उतारा दुश्मनों की चुनौती खत्म करने वाला युद्धपोत
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को नई मजबूती देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धपोत 'मछलीपट्टनम' का जलावतरण किया गया. यह आठ जहाजों की श्रृंखला का सातवां युद्धपोत है, जिसे आधुनिक समुद्री चुनौतियों का सामना करने के लिए विकसित किया गया है. इसकी विशेष क्षमताएं नौसेना को पनडुब्बी रोधी अभियानों, समुद्री निगरानी और तटीय सुरक्षा में अतिरिक्त बढ़त प्रदान करेंगी.

'मछलीपट्टनम' का निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में किया जा रहा है. इसका जलावतरण गुलरुख आनंद ने किया. इस अवसर पर सैन्य मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव वाइस एडमिरल अतुल आनंद सहित भारतीय नौसेना, शिपयार्ड और रक्षा क्षेत्र के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. समारोह के दौरान इस परियोजना को स्वदेशी रक्षा निर्माण की दिशा में अहम उपलब्धि बताया गया.

समुद्री सुरंगों और पनडुब्बियों से निपटने में सक्षम

यह युद्धपोत आधुनिक तकनीक से लैस है और पानी के भीतर निगरानी, पनडुब्बी रोधी अभियान तथा कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है. इसके साथ ही इसे समुद्री सुरंगों से निपटने की क्षमता के साथ तैयार किया गया है. इससे भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा और समुद्री क्षेत्र में निगरानी क्षमता को और मजबूती मिलेगी.

ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा नाम

इस युद्धपोत का नाम आंध्र प्रदेश के ऐतिहासिक बंदरगाह शहर मछलीपट्टनम के नाम पर रखा गया है. यह शहर अपनी समृद्ध समुद्री परंपरा और ऐतिहासिक व्यापारिक महत्व के लिए जाना जाता है. युद्धपोत का नाम भारत की समुद्री विरासत और नौसैनिक परंपराओं को सम्मान देने के साथ समुद्री सुरक्षा के प्रति देश की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है.

आत्मनिर्भर भारत को मिली नई ताकत

'मछलीपट्टनम' का जलावतरण रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है. इस युद्धपोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है. इससे देश के जहाज निर्माण उद्योग की बढ़ती क्षमता और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में हुए विकास का भी प्रदर्शन होता है.

नौसेना की संचालन क्षमता होगी मजबूत

विशेषज्ञों के अनुसार इस युद्धपोत के शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा और संचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के रणनीतिक हितों की रक्षा करने के साथ समुद्री चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में भी मदद करेगा. आधुनिक तकनीक और स्वदेशी निर्माण का यह संयोजन भविष्य की सुरक्षा आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.