नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बीच भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है. इसी परिप्रेक्ष्य में भारतीय ध्वज वाले एलपीजी वाहक जहाज 'जग वसंत' और 'पाइन गैस' फारस की खाड़ी से भारत की ओर बढ़ रहे हैं.
दोनों जहाज फिलहाल लारक-केश्म चैनल की ओर बढ़ रहे हैं और संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने की तैयारी में हैं. हाल के संघर्ष ने इस समुद्री मार्ग को जोखिमपूर्ण बना दिया है, जिससे वैश्विक व्यापार पर असर पड़ा है.
जग वसंत और पाइन गैस ऐसे समय में आगे बढ़ रहे हैं जब क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां प्रभावित हैं. 28 फरवरी से शुरू हुए तनाव के कारण कई जहाज ईरान और ओमान के बीच फंसे हुए थे. इसके बावजूद भारतीय जहाज सावधानी के साथ अपने मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं.
भारत के प्रयासों से पिछले सप्ताह 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' नामक दो जहाज सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार कर गुजरात पहुंच चुके हैं. यह घटनाक्रम भारत की रणनीतिक योजना और समुद्री सुरक्षा के प्रति सतर्कता को दर्शाता है. इससे अन्य जहाजों के लिए भी उम्मीद जगी है.
20 मार्च को सरकार ने स्पष्ट किया कि वह ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय है. निर्यातकों को राहत देने के लिए 497 करोड़ रुपये का पैकेज भी घोषित किया गया है. विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत लगातार अन्य देशों से संपर्क बनाए हुए है.
20 से अधिक देशों ने संयुक्त बयान जारी कर होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर चिंता जताई है. इन देशों ने ईरान पर वाणिज्यिक जहाजों और ऊर्जा ढांचे पर हमले का आरोप लगाया है. इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना हुआ है.
वहीं, ईरान ने दो टूक कहा कि अगर अमेरिका उसके बिजली संयंत्रों पर हमला करता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा. यह रास्ता दुनिया के 20 प्रतिशत तेल का मुख्य मार्ग है. ईरान ने पहले ही संकट को प्रभावी रूप से बंद कर रखा है और शत्रु देशों के जहाजों को गुजरने से रोका जा रहा है. इससे वैश्विक तेल आपूर्ति ठप हो गई है और कीमतें आसमान छू रही हैं.