नई दिल्ली: लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर संबोधन दिया. उन्होंने बताया कि यह संघर्ष भारत के लिए क्यों मायने रखता है. खाड़ी देशों में रहने वाले एक करोड़ भारतीय, ऊर्जा आपूर्ति का होर्मुज रास्ता और इस क्षेत्र से गहरे व्यापारिक संबंध, इन सबके चलते भारत की चिंता बाकी देशों से कहीं ज्यादा है. प्रधानमंत्री ने सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की विस्तार से जानकारी दी.
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि संघर्ष प्रभावित देशों में भारतीय दूतावास लगातार सक्रिय हैं. चौबीसों घंटे हेल्पलाइन और आउटरीच रूम बनाए गए हैं. जंग शुरू होने के बाद अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं. ईरान से अकेले करीब 1000 भारतीय वापस आए हैं, जिनमें 700 से अधिक मेडिकल छात्र शामिल हैं.
प्रधानमंत्री ने बताया कि खाड़ी देशों में पढ़ने वाले भारतीय बच्चों की पढ़ाई पर असर न पड़े, इसके लिए सीबीएसई ने वहां के स्कूलों में 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं. साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बच्चों की शिक्षा बिना रुकावट जारी रहे. यह कदम भारतीय छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखकर उठाया गया है.
प्रधानमंत्री जी का देश को संदेश - युद्ध के प्रभाव लंबे समय तक रहने की संभावना है
— Shivam Tyagi (Modi Ka Parivar) (@ShivamSanghi12) March 23, 2026
हम एकजुट रहकर इसको भी संभाल लेंगे हमने कोरोना के समय भी ऐसी चुनौती देखी है 🙏 pic.twitter.com/eJBJhirz3m
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का 60 फीसदी एलपीजी बाहर से मंगाता है. होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति आना अब चुनौतीपूर्ण हो गया है, लेकिन सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को पहली प्राथमिकता दी है. पिछले 11 सालों में देश की सौर ऊर्जा क्षमता 3 गीगावाट से बढ़कर 140 गीगावाट हो गई है, जो 46 गुना से अधिक की बढ़ोतरी है.
प्रधानमंत्री ने बताया कि पीएम सूर्यघर फ्री बिजली योजना के तहत पिछले एक साल में 40 लाख रूफटॉप सोलर पैनल लगाए गए हैं. गोवर्धन योजना के तहत 200 कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट चालू हो चुके हैं. परमाणु ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि भविष्य में ऊर्जा के लिए बाहरी निर्भरता कम हो. साथ ही सभी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है.