India Bangladesh Relationship: पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की PM शेख हसीना के बीच मुलाकात हुई. इसमें तीस्ता जल बंटवारे समझौते पर सहमति बनाई गई. अब इस बैठक में अपनी मौजूदगी न होने को लेकर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नाराजगी जताई है. उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा 'मैं बांग्लादेश के लोगों से प्यार करती हूं..' पर एकतरफा विचार-विमर्श और चर्चा स्वीकार नहीं है. आइये जानें ममता बनर्जी ने ऐसा क्यों कहा है?
ममता बनर्जी ने कहा है कि बांग्लादेश के साथ जल वार्ता में बंगाल के हितों की अनदेखी है. शेख हसीना के साथ वार्ता से उन्हें बाहर रखा गया. राज्य सरकार से परामर्श और राय लिए बिना इस तरह का विमर्श वांछनीय नहीं है.
ममता बनर्जी ने पीएम को संबोधित करते हुए एक पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के साथ भारत और कोलकाता के गहरे संबंध हैं. मैं बांग्लादेश के लोगों से प्यार करती हूं और उनका सम्मान भी करती हूं और हमेशा उनकी भलाई के लिए सोचती हूं. पश्चिम बंगाल ने पहले भी सभी विषयों पर बांग्लादेश का सहयोग किया है. पानी बंगाल के लोगों की अनमोल है. ऐसे संवेदनशील मुद्दे से हम समझौता नहीं कर सकते. लेकिन, ऐसे समझौतों से पश्चिम बंगाल के लोग प्रभावित होंगे.
Mamata Banerjee protests and writes letter to #PM on #Teesta and #Farakka .
— Kamalika Sengupta (@KamalikaSengupt) June 24, 2024
She says how can #Farakka #Teesta talks takes place without keeping Bengal in loop . Central selling Bengal says @MamataOfficial pic.twitter.com/SFz2Xh7ht2
उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि मुझे पता चला है कि भारत सरकार फरक्का संधि (1996) को नवीनीकृत करने का मन बना रही है. ये 2026 में समाप्त होने वाली है. इससे बांग्लादेश और भारत के बीच जल बंटवारा रेखांकित होता है. आपको पता है इससे पश्चिम बंगाल के लोगों की आजीविका पर प्रभाव होगा. फरक्का बैराज का कोलकाता बंदरगाह की नौगम्यता को बनाने में मदद करता है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि पहले भी कई पत्र में उन्होंने इस मुद्दे को कई बार उठाया है. मेरा अनुरोध है कि केंद्र सरकार समझौते पर बंगाल की आपत्ति को गंभीरता से ले और राज्य सरकार की सहमति के बिना आगे न बढ़े. मेरे लिए पश्चिम बंगाल के लोगों का हित सर्वोपरि है. इससे समझौता नहीं किया जाना चाहिए.
बता दें हाल ही में PM मोदी और बांग्लादेश की PM शेख हसीना के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई थी. इसमें तीस्ता नदी के संरक्षण और 1996 की गंगा जल संधि के नवीनीकरण पर बात हुई है. इसके बाद प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि एक तकनीकी टीम जल्द ही "तीस्ता नदी के संरक्षण और प्रबंधन" पर चर्चा के लिए बांग्लादेश जाएगी. माना जा रहा है कि भारत तीस्ता जल प्रबंधन के लिए जलाशय बनाने की योजना बना रहा है. इसी बात से ममता बनर्जी में असंतोष है.