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149 साल बाद सूखे की मार! इस साल अल-नीनो लेकर आएगा तबाही? मानसून को लेकर IMD ने जारी की चेतावनी

भारतीय मौसम विभाग ने मानसून को लेकर पूर्वानुमान जारी कर दिया है. आईएमडी के अनुसार इस बार देश में समय से पहले ही मौसम दस्तक दे सकता है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
149 साल बाद सूखे की मार! इस साल अल-नीनो लेकर आएगा तबाही? मानसून को लेकर IMD ने जारी की चेतावनी
Courtesy: ai generated

नई दिल्ली: भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने जानकारी दी है कि साउथ-वेस्ट मानसून ने इस साल उम्मीद से पहले देश के कई हिस्सों में दस्तक दे दी है. मौसम विभाग के अनुसार, मानसून साउथ-ईस्ट अरब सागर, साउथ-वेस्ट और साउथ-ईस्ट बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और पूरे निकोबार द्वीप समूह तक पहुंच चुका है. अंडमान द्वीप समूह के कुछ हिस्सों जिनमें श्री विजयपुरम भी शामिल है वहां भी मानसून की एक्टिविटी शुरू हो गई हैं.

आईएमडी ने जारी किया पूर्वानुमान

आईएमडी के अनुसार अगले तीन से चार दिनों के दौरान मौसम की स्थिति मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल बनी हुई है. संभावना है कि मानसून जल्द ही साउथ-ईस्ट अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के और इलाकों तक पहुंच सकता है. इसके अलावा अंडमान द्वीप समूह के बाकी हिस्सों और पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी के कुछ इलाकों में भी मानसून पहुंच सकता है.

समय से पहले आएगा मानसून

मौसम विभाग ने पहले ही अनुमान लगाया था कि इस बार मानसून केरल में अपने समय से पहले पहुंच सकता है. आमतौर पर केरल में मानसून 1 जून को पहुंचता है लेकिन इस बार इसके करीब 26 मई तक पहुंचने की संभावना जताई गई है. केरल में मानसून की एंट्री को भारत में बारिश के मौसम की ऑफिशियली शुरूआत माना जाता है जो जून से सितंबर तक चलता है.

अल नीनो का दिखेगा देश पर असर

हालांकि मानसून भले ही जल्दी आ रहा है लेकिन आईएमडी ने यह भी चेतावनी दी है कि इस साल देश में होने वाली बारिश से इस इस बार बारिश कम होगी. इसकी बड़ी वजह एल नीनो वेदर सिस्टम को माना जा रहा है. गौरतलब है कि अल नीनो एक क्लाइमेट कंडीशन है जिसमें प्रशांत महासागर का तापमान नॉर्मल से ज्यादा गर्म हो जाता है. और इसका असर दुनियाभर के मौसम पर पड़ता है.

कमजोर बारिश के मिले हैं संकेत

भारत में एल नीनो का कनेक्शन अक्सर कमजोर मानसून और कम बारिश से जोड़ा जाता है. इसके कारण कई इलाकों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है. आईएमडी के अनुसार इस साल सामान्य से कम बारिश होने की संभावना बढ़कर 35 प्रतिशत तक पहुंच गई है.

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की शुरुआत भले जल्दी हो रही हो लेकिन पूरे सीजन में बारिश की मात्रा वर्ल्ड क्लाइमेट सिचुएशन पर निर्भर करेगी. किसान और खेती से जुड़े लोग मानसून पर खास नजर बनाए हुए हैं क्योंकि देश की खेती और इकोनॉमी काफी हद तक अच्छी बारिश पर डिपेंड होती है.

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