भारत की सुरक्षा और नारकोटिक्स एजेंसियों को एक बड़ी कामयाबी मिली है. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने ऑपरेशन रेजपिल के तहत देश में पहली बार जिहादी ड्रग या गरीबों का कोकीन कही जाने वाली कैप्टागन टैबलेट्स की एक बड़ी खेप जब्त की है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस बड़ी सफलता की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि नशामुक्त भारत अभियान के तहत यह अहम कार्रवाई की गई है. NCB ने गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह और दिल्ली के नेब सराय इलाके से लगभग 182 करोड़ रुपये की कैप्टागन टैबलेट्स बरामद की हैं. जांच में सामने आया है कि इन ड्रग्स को खाड़ी देशों में तस्करी कर भेजा जाना था. इस मामले में एक विदेशी नागरिक को भी गिरफ्तार किया गया है. यह युवक सीरियाई से हो सकता है.
Modi govt is resolved for a ‘Drug-Free India’.
— Amit Shah (@AmitShah) May 16, 2026
Glad to share that through ‘Operation RAGEPILL’, our agencies have achieved the first-ever seizure of Captagon, the so-called “Jihadi Drug”, worth ₹182 crore.
The busting of the drug consignment destined for the Middle East and…
कैप्टागन एक बेहद नशीला उत्तेजक पदार्थ है. 1960 के दशक में इसके मूल रूप फेनेथिलिन को ध्यान केंद्रित न कर पाने और नार्कोलेप्सी जैसी बीमारियों के इलाज के लिए बनाया गया था. इसकी लत लगने के खतरे को देखते हुए 1980 के दशक में कई देशों ने इसे बैन कर दिया और बाद में संयुक्त राष्ट्र ने भी इसे अनुसूची II में डाल दिया.
वर्तमान में ब्लैक मार्केट में बिकने वाली यह ड्रग एम्फैटेमिन, कैफीन और मेथैम्फैटेमिन जैसे सिंथेटिक रसायनों का खतरनाक मिश्रण है. इसे जिहादी ड्रग इसलिए कहा जाता है. सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान इस्लामिक स्टेट (ISIS) के आतंकियों ने निडर होने, लंबे समय तक जागने और थकान मिटाने के लिए इसका भारी मात्रा में इस्तेमाल किया था.
इस दवा को लेने वाले इंसान को अचानक बहुत ज्यादा ऊर्जा मिल जाती है. उसे भूख या थकान महसूस नहीं होती. इसके साइड इफेक्ट्स बहुत भयानक हैं. यह इंसान में हिंसक व्यवहार, गुस्सा, लापरवाही और लंबे समय में मानसिक विक्षिप्तता पैदा कर सकती है.