गुजरात में पाटीदार आरक्षण आंदोलन का नेतृत्व कर चुके और वर्तमान में भाजपा विधायक हार्दिक पटेल ने आरक्षण व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि आरक्षण पूरी तरह समाप्त करने के बजाय इसे अधिक प्रभावी और जरूरतमंद लोगों तक सीमित बनाने की जरूरत है. उनके अनुसार, सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े तथा वास्तविक रूप से जरूरतमंद लोगों को ही इसका लाभ मिलना चाहिए, ताकि व्यवस्था का उद्देश्य पूरा हो सके.
देशभर में आरक्षण व्यवस्था को लेकर चल रहे ऑनलाइन अभियान ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है. इस अभियान के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग जुड़ रहे हैं और विभिन्न राज्यों के नाम से अलग-अलग सोशल मीडिया पेज भी बनाए गए हैं. अभियान का प्रमुख संदेश "सारी जाति एक समान, मेरा बस ये देश महान" रखा गया है. इस डिजिटल अभियान के बाद आरक्षण व्यवस्था पर नई बहस शुरू हो गई है, जिस पर सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की भी नजर बनी हुई है.
हार्दिक पटेल ने कहा कि जिन परिवारों ने आरक्षण का लाभ लेकर आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूती हासिल कर ली है, उन्हें अपने समाज के कमजोर वर्गों के हित में स्वेच्छा से आरक्षण छोड़ने पर विचार करना चाहिए. उनका कहना है कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर का उद्देश्य समाज के सबसे वंचित और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक अवसर पहुंचाना था. इसलिए आरक्षण का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचना अधिक महत्वपूर्ण है.
पाटीदार आंदोलन से जुड़े अन्य नेताओं, जिनमें खोडलधाम ट्रस्ट के ट्रस्टी दिनेश बामणिया और सरदार पटेल ग्रुप के संस्थापक लालजी पटेल शामिल हैं, ने भी आरक्षण व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर सहमति जताई है. उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा कर इसे अधिक न्यायसंगत बनाया जाना चाहिए. हालांकि, उन्होंने आरक्षण समाप्त करने की बजाय सुधार के पक्ष में अपनी राय रखी है.
पाटीदार आंदोलन के बाद देश में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया था. अब आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर गुजरात में फिर से चर्चा तेज होती दिखाई दे रही है. पाटीदार संगठनों ने इस विषय पर बैठक करने की भी तैयारी शुरू कर दी है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर नई बहस और गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं.