नई दिल्ली में आयोजित द इकनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2025 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि यह मानना गलत होगा कि अमेरिका के साथ किसी घटना का सीधा असर चीन के साथ भारत के रिश्तों पर पड़ता है.
जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के रिश्तों को स्वतंत्र दृष्टिकोण से देखना चाहिए. उन्होंने कहा, 'यह काला और सफेद मामला नहीं है. अमेरिका के साथ कुछ हुआ, तो तुरंत चीन के साथ भी वैसा ही होगा, यह सोचना गलत है. हर संबंध की अपनी समयरेखा और समस्याएं होती हैं.' विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत-चीन रिश्तों का प्रवाह अपनी दिशा में चलता है और इसे अमेरिका से जोड़कर देखना वास्तविकता नहीं है.
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और भारत के बीच व्यापार को लेकर तनाव बढ़ा है. ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में भारत से आने वाले सामानों पर भारी टैरिफ लगा दिया है. जयशंकर ने इस फैसले को 'अनुचित और असंगत' बताया और कहा कि भारत अपने किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल तेल खरीद का नहीं है, बल्कि इसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है.
जयशंकर ने कहा कि भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर उंगलियां उठाई जा रही हैं, जबकि चीन और यूरोपीय देश कहीं बड़े आयातक होने के बावजूद आलोचना से बच निकले हैं. उन्होंने कहा 'जो तर्क भारत के खिलाफ इस्तेमाल किए जा रहे हैं, वे चीन, जो सबसे बड़ा तेल आयातक है, और यूरोप, जो सबसे बड़ा एलएनजी आयातक है, पर लागू नहीं किए गए'
जयशंकर हाल ही में मास्को गए थे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और शीर्ष रूसी अधिकारियों से मुलाकात की. उनके इस बयान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी जापान और चीन यात्रा से भी जोड़ा जा रहा है, जहां वह शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपने कूटनीतिक संतुलन को बनाए रखते हुए अमेरिका, चीन और रूस के साथ अलग-अलग प्राथमिकताओं पर काम करना चाहता है.