नई दिल्ली: देश में एलपीजी की बढ़ती किल्लत के बीच एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बावजूद, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत के 9वें टैंकर 'ग्रीन आशा' को निकलने की इजाजत मिल गई है. भारतीय झंडे वाला यह पोत बड़ी मात्रा में एलपीजी लेकर भारत के लिए रवाना हो चुका है, जिससे घरेलू बाजार में रसोई गैस की कमी दूर होने की उम्मीद जगी है.
शिपिंग क्षेत्र से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, भारत का एक अन्य पोत 'जग विक्रम' अभी भी अनुमति मिलने का इंतजार कर रहा है. सुरक्षा कारणों से ये टैंकर होर्मुज पहुंचने से पहले ही रुक जाते हैं और मंजूरी मिलने के बाद ही इन्हें चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाता है. राहत की बात यह है कि ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह कच्चे तेल और एलपीजी वाले पोतों को प्राथमिकता दे रहा है. ईरान के कड़े रुख के बावजूद भारत के प्रति उसका रवैया नरम बना हुआ है, जबकि अमेरिका और इजरायल का साथ देने वाले देशों के लिए यह जलमार्ग बंद कर दिया गया है.
शिपिंग महानिदेशालय की रिपोर्ट के मुताबिक, अभी भी करीब 16 भारतीय जहाज होर्मुज के पास फंसे हुए हैं, जिनमें से 5 शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के हैं. इस पूरे खाड़ी क्षेत्र में भारत के लगभग 20,500 नाविक मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर सरकार बेहद सतर्क है. भारत लगातार ईरान के साथ उच्च स्तरीय कूटनीतिक वार्ता कर रहा है. इसी कूटनीति का परिणाम है कि 3 अप्रैल को 'ग्रीन सांवी' के जरिए 46 हजार टन एलपीजी की खेप भारत की ओर रवाना की जा सकी थी और हाल ही में 'BW TYR' टैंकर सुरक्षित मुंबई पहुंचा है.
इस राहत के बीच डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने युद्ध की आग को और भड़का दिया है. ट्रंप ने दावा किया है कि तेहरान पर हुए भीषण हमले में ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारी मारे गए हैं. ईरान को खुली चुनौती देते हुए ट्रंप ने कहा, 'समझौते या होर्मुज खोलने के लिए दिए गए 10 दिनों में से अब केवल 48 घंटे बचे हैं. इसके बाद ईरान पर चौतरफा आफत बरसेगी.' ट्रंप की यह चेतावनी संकेत दे रही है कि यदि ईरान ने अपनी जिद नहीं छोड़ी, तो आने वाले दो दिन वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और सुरक्षा के लिहाज से बेहद घातक हो सकते हैं.