पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होना हैं. इन सभी राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त बनाने के लिए बीएसएफ के जवानों को मतदान केंद्रों पर विशेष भूमिका दी गई है. बीएसएफ के जवान मतदाताओं के पहचान पत्रों की जांच करेंगे तथा मतदान स्थलों पर लगे सीसीटीवी कैमरों का पूरा नियंत्रण भी उनके हाथों में ही रहेगा.
अभी कुछ दिनों के भीतर असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होना है. इन राज्यों में सही तरीके से चुनाव हो सके इसके लिए केंद्र सरकार ने भारी संख्या में अर्धसैनिक बलों को तैनात करने का फैसला किया है. सूत्रों के मुताबिक इन राज्यों में लगभग ढाई लाख से तीन लाख केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों को ड्यूटी पर तैनात किया जाएगा.
बीएसएफ ने अपने सभी फ्रंटियर हेडक्वार्टर और यूनिटों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि चुनाव प्रक्रिया को स्वतंत्र और निष्पक्ष रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं. बीएसएफ के आदेश में सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान इंस्पेक्टर और उससे ऊपर रैंक के उन अधिकारियों को लेकर है, जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में इन पांचों राज्यों में ड्यूटी की थी. अब ऐसे सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटाकर उनकी जगह नए अधिकारियों को तैनात किया जाएगा. बीएसएफ ने अपनी इकाइयों को सख्त हिदायत दी है कि इस प्रक्रिया को तुरंत पूरा किया जाए. फ्रंटियर हेडक्वार्टर इस बदलाव की निगरानी कर रहा है ताकि कोई भी पुराना अधिकारी इन चुनावों में ड्यूटी न कर सके.
बीएसएफ के निर्देश के मुताबिक, हर मतदान केंद्र पर एक पुरुष और एक महिला जवान तैनात किए जाएंगे. इन जवानों का मुख्य दायित्व मतदाताओं के पहचान पत्रों की जांच करना होगा. इसके अलावा, मतदान स्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरे का पूरा नियंत्रण भी इन्हीं जवानों के पास रहेगा.
इस फैसले पर विपक्षी दलों की ओर से नाराजगी जताई जा रही है. तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने बीएसएफ के इस कदम को चुनाव आयोग के नियमों का उल्लंघन बताया है. महुआ मोइत्रा का कहना है कि मतदाताओं की पहचान जांच का काम पारंपरिक रूप से चुनाव आयोग के मतदान अधिकारियों द्वारा किया जाता रहा है. अर्धसैनिक बलों को यह जिम्मेदारी सौंपना चुनाव आयोग की भूमिका में दखलंदाजी है. चुनाव आयोग ने इन राज्यों में शांतिपूर्ण मतदान के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती को जरूरी बताया है.