नई दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में राष्ट्रीय सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का शुभारंभ किया गया. इस अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता समय पर फैसले देने से ही मजबूत होती है.
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि किसी अदालत तक पहुंच बना लेना ही न्याय नहीं है. वास्तविक न्याय तब माना जाएगा, जब जटिल और संवेदनशील मामलों का भी उचित समय के भीतर निष्पक्ष फैसला सुनाया जाए. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में कई राज्यों की जांच एजेंसियां, बड़ी मात्रा में दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड, फोरेंसिक साक्ष्य और अनेक आरोपी शामिल होते हैं. ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेषज्ञता और निरंतर न्यायिक निगरानी आवश्यक है.
मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि नई विशेष अदालतें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अधिनियम, यूएपीए, एनडीपीएस और एमसीओसीए जैसे कानूनों के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई करेंगी. उनका मानना है कि इन अदालतों में कार्यरत न्यायाधीश समय के साथ संबंधित विषयों में विशेष अनुभव विकसित करेंगे. इससे मामलों की सुनवाई लगातार जारी रहेगी, केस मैनेजमेंट बेहतर होगा और फैसलों में एकरूपता के साथ न्यायिक दक्षता भी बढ़ेगी.
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि लंबे समय तक मुकदमे लंबित रहने से पीड़ितों की उम्मीद प्रभावित होती है और विचाराधीन कैदियों को भी अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है. समय बीतने के साथ साक्ष्य कमजोर पड़ सकते हैं और न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा भी कम होता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि समयबद्ध फैसला न्याय प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है और अदालतों को इस दिशा में लगातार काम करना चाहिए.
मुख्य न्यायाधीश ने दिल्ली को न्यायिक नवाचार की प्रयोगशाला बताते हुए उम्मीद जताई कि यहां शुरू की गई यह व्यवस्था भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बनेगी. उन्होंने कहा कि इस पहल की सफलता न्यायाधीशों, जांच एजेंसियों, अभियोजकों, वकीलों और अदालत के कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों पर निर्भर करेगी. उन्होंने विश्वास जताया कि इन विशेष अदालतों से लंबित मामलों में कमी आएगी, सुनवाई में निरंतरता बनी रहेगी और लोगों को समय पर न्याय मिल सकेगा.