बारिश और तेज हवाओं के बावजूद आजाद समाज पार्टी के प्रमुख एवं उत्तर प्रदेश के नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद संसद परिसर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठे हुए हैं. उनके पीछे शिक्षा सुधार, कथित पेपर लीक और जवाबदेही की मांग वाले पोस्टर लगे हुए हैं. उनके धरने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रही हैं.
चंद्रशेखर आजाद ने बताया कि उन्होंने यह कदम जंतर-मंतर और संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के वीडियो देखने के बाद उठाया. उनका कहना है कि छात्र लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने समय रहते संवाद नहीं किया. उनके मुताबिक, यदि पहले बातचीत होती तो टकराव की स्थिति से बचा जा सकता था. उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज संसद तक पहुंचाने के लिए उन्होंने संसद परिसर के भीतर विरोध दर्ज कराया.
सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मेरा मक़सद नहीं,
— Chandra Shekhar Aazad (@BhimArmyChief) July 21, 2026
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
हो गई है पीर पर्वत-सी, पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।#संसद_मार्च #जंतर_मंत्र pic.twitter.com/ZoAl7MML0I
धरने के दौरान सांसद ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया. उन्होंने दावा किया कि कई छात्रों, विशेषकर छात्राओं, को चोटें आईं और प्रदर्शन को दबाने के लिए सख्त कार्रवाई की गई. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. आजाद का कहना है कि लोकतंत्र में विरोध की आवाज को बल प्रयोग से नहीं, बल्कि संवाद के जरिए सुना जाना चाहिए.
बारिश की हर बूँद स्वीकार है, मगर मासूमों पर अन्याय स्वीकार नहीं, जिन्होंने अन्याय किया वो कितने ही ताकतवर क्यों ना हो, उनके पीछे कितनी बड़ी शक्ति क्यों ना हो, लेकिन जवाब देना ही होगा।
— Chandra Shekhar Aazad (@BhimArmyChief) July 22, 2026
महापुरुषों के विचार ही मेरे संघर्ष की ताक़त हैं। जय भीम, जय भारत। pic.twitter.com/14uRLsh41v
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार सुनिश्चित करना है. उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग दोहराई, लेकिन साथ ही कहा कि केवल इस्तीफे से समस्या का समाधान नहीं होगा. उनके अनुसार, परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियां संस्थागत सुधार की मांग करती हैं और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए.
सांसद ने कहा कि सुरक्षा कारणों से छात्र संसद परिसर में नहीं आ सकते, इसलिए उन्होंने उनके प्रतिनिधि के रूप में भीतर से संघर्ष करने का फैसला किया. उन्होंने कहा कि यदि छात्रों की लड़ाई संसद के बाहर चल रही है तो वह संसद के भीतर उनकी आवाज बनेंगे. उनका यह भी कहना था कि वह इस संघर्ष को अकेले भी जारी रखने के लिए तैयार हैं और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर पीछे नहीं हटेंगे.
धरने के दौरान चंद्रशेखर आजाद लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो और संदेश साझा कर रहे हैं. उन्होंने अपने संदेशों में कहा कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष किसी भी मौसम से बड़ा होता है. उनके धरने को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने भी समर्थन दिया है और छात्रों पर हुई कथित कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगा है. इस बीच, संसद परिसर में बारिश के बीच बैठे सांसद की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन रही हैं, जिससे शिक्षा सुधार और छात्र आंदोलनों पर बहस एक बार फिर तेज हो गई.