नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरद पवार गुट के प्रमुख शरद पवार की मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी है. छात्र आंदोलन के समर्थन के तुरंत बाद हुई इस बैठक को विपक्ष की रणनीति और आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है.
संसद के मानसून सत्र के दौरान शरद पवार पहले जंतर-मंतर पहुंचे, जहां उन्होंने CJP के संस्थागत अभिजीत दिपके और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात कर उनके आंदोलन के प्रति समर्थन जताया. इसके कुछ समय बाद वह सांसद सुप्रिया सुले के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचे. इन दोनों घटनाओं के बीच कम अंतराल होने के कारण राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं. विपक्षी दल पहले से ही छात्र आंदोलन और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेर रहे हैं, ऐसे में इस मुलाकात ने नई राजनीतिक अटकलों को जन्म दिया है.
हाल के दिनों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव छात्र आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए थे. शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे भी प्रदर्शनकारियों से मिलने पहुंचे थे. ऐसे माहौल में शरद पवार की प्रधानमंत्री से मुलाकात को विपक्ष के भीतर संभावित मतभेदों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि इस बैठक को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से राजनीतिक उद्देश्य का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन विपक्षी गठबंधन INDIA की रणनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है.
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि संसद में आने वाले परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर एनसीपी एसपी व्यावहारिक रुख अपना सकती है. विश्लेषकों का मानना है कि शरद पवार लंबे समय से सत्ता और विपक्ष दोनों के साथ संवाद बनाए रखने की राजनीति करते रहे हैं. उनके समर्थकों का कहना है कि यह महाराष्ट्र के हितों और राष्ट्रीय मुद्दों पर संतुलित दृष्टिकोण का हिस्सा हो सकता है. वहीं आलोचकों का मानना है कि ऐसे कदम विपक्ष की साझा रणनीति को कमजोर कर सकते हैं. फिलहाल इस मुलाकात ने मानसून सत्र के बीच राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है.