नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परिवार से आने वाले चंद्र कुमार बोस ने तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपने इस्तीफे की वजह व्यक्तिगत कारण बताई है. हालांकि उनके इस फैसले को राज्य की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है. फिलहाल तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
चंद्र कुमार बोस ने पार्टी नेतृत्व को भेजे अपने पत्र में लिखा कि वह व्यक्तिगत कारणों से तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रहे हैं. उन्होंने अपने पत्र में किसी राजनीतिक मतभेद या विवाद का उल्लेख नहीं किया. पार्टी ने भी अभी तक उनके इस्तीफे पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है.
चंद्र कुमार बोस ने वर्ष 2023 में भारतीय जनता पार्टी छोड़ दी थी. उस समय उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा नेताजी सुभाष चंद्र बोस की समावेशी राष्ट्रवादी सोच को आगे बढ़ाने के अपने वादे पर खरी नहीं उतरी. इसके बाद उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था और अधिक समावेशी राजनीति की वकालत की थी.
चंद्र कुमार बोस वर्ष 2016 में भाजपा से जुड़े थे. उन्होंने उसी वर्ष पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव और वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव पार्टी के टिकट पर लड़ा. उन्हें पश्चिम बंगाल भाजपा का उपाध्यक्ष भी बनाया गया था. हालांकि वर्ष 2020 के संगठनात्मक फेरबदल के दौरान उन्हें इस जिम्मेदारी से हटा दिया गया था.
चंद्र कुमार बोस देश के प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से आते हैं. वह पूर्व सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता अमिय नाथ बोस के पुत्र तथा नेताजी के बड़े भाई शरत चंद्र बोस के पौत्र हैं. इस नाते वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस के भतीजे के पुत्र हैं. उन्होंने लंबे समय तक निजी क्षेत्र में भी कार्य किया और बाद में अपना उद्यम स्थापित किया.
राजनीति के अलावा चंद्र कुमार बोस नेताजी की विरासत के संरक्षण से जुड़े अभियानों में भी सक्रिय रहे हैं. उन्होंने नेताजी से संबंधित गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग को लेकर कई प्रयास किए. इसके साथ ही ऐतिहासिक अभिलेखों तक आम लोगों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भी लगातार आवाज उठाई. उनके इस्तीफे के बाद अब उनकी अगली राजनीतिक रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हैं.