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गुजरात में चांदीपुरा वायरस का कहर, 22 बच्चों की मौत; स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर

गुजरात में चंडीपुरा वायरस के मामलों ने चिंता बढ़ा दी है. स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंसेरिया के अनुसार, इस मानसून सीजन में अब तक 22 बच्चों की मौत हो चुकी है.

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Edited By: Reepu Kumari
गुजरात में चांदीपुरा वायरस का कहर, 22 बच्चों की मौत; स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर
Courtesy: Pinterest

गुजरात में चंडीपुरा वायरस को लेकर हालात गंभीर बने हुए हैं. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया ने बताया कि इस मानसून सीजन में अब तक 22 बच्चों की संक्रमण के कारण मौत हो चुकी है. राज्य में सामने आए 184 संदिग्ध मामलों में से 35 में वायरस की पुष्टि हुई है, जबकि 11 नमूनों की जांच रिपोर्ट अभी आना बाकी है. स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण को देखते हुए पूरे राज्य में निगरानी बढ़ा दी है. सरकारी अस्पतालों में संक्रमित बच्चों का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में किया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि समय पर इलाज और सतर्कता ही इस वायरस से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है.

सात बच्चों का इलाज जारी, छह मरीज हो चुके स्वस्थ

स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, फिलहाल सात संक्रमित बच्चों का राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में इलाज चल रहा है. गांधीनगर, साबरकांठा-हिम्मतनगर, पाटन, राजकोट और भावनगर के अस्पतालों में भर्ती बच्चों को विशेष चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है. वहीं छह बच्चे उपचार के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी पा चुके हैं.

15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में मिले सभी पुष्ट मामले

सरकार ने स्पष्ट किया है कि संक्रमण की पुष्टि वाले सभी मरीजों की आयु 15 वर्ष से कम है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, वायरस किसी एक जिले या गांव तक सीमित नहीं है. राज्य के अलग-अलग हिस्सों से मामले सामने आने के कारण पूरे गुजरात में स्वास्थ्य एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं.

संक्रमण रोकने के लिए तेज किया गया बचाव अभियान

वायरस के प्रसार को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़े पैमाने पर निगरानी और कीटनाशक छिड़काव शुरू किया है. विशेष रूप से उन इलाकों पर ध्यान दिया जा रहा है जहां रेत मक्खियां अधिक पाई जाती हैं, क्योंकि इन्हें चंडीपुरा वायरस का प्रमुख वाहक माना जाता है. लोगों को मिट्टी के घरों और दीवारों की दरारें बंद करने की भी सलाह दी गई है.

अस्पतालों को जारी किए गए विशेष निर्देश

राज्य सरकार ने सभी सरकारी और निजी बाल चिकित्सा अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि तेज बुखार, उल्टी, दौरे या चेतना में बदलाव जैसे लक्षण वाले बच्चों को तुरंत गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती किया जाए. अधिकारियों का कहना है कि समय पर ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और अन्य जरूरी उपचार मिलने से गंभीर जटिलताओं का जोखिम कम किया जा सकता है.

फिलहाल नहीं है कोई विशेष टीका या दवा

चंडीपुरा वायरस के लिए अभी तक कोई विशेष टीका या एंटीवायरल उपचार उपलब्ध नहीं है. स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंसेरिया ने लोगों से अफवाहों से बचने और घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की है. उन्होंने कहा कि बच्चों में लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और स्वास्थ्य विभाग की टीमों के साथ सहयोग करें. चंडीपुरा एन्सेफलाइटिस एक दुर्लभ वायरल बीमारी है, जिसकी पहचान पहली बार वर्ष 1965 में महाराष्ट्र के चंडीपुरा गांव में हुई थी.