नई दिल्ली: बजट सत्र 2026 का पहला दिन संसद में राजनीतिक गर्माहट के साथ शुरू हुआ. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संयुक्त सदन को संबोधित करने के दौरान विपक्षी दलों ने विवादित VB-G RAM G बिल को लेकर तीखा विरोध दर्ज कराया. नारेबाजी और शोरगुल के बीच भी राष्ट्रपति ने अपना संबोधन जारी रखा. अपने भाषण में उन्होंने अर्थव्यवस्था, सामाजिक न्याय, अंतरिक्ष कार्यक्रम, राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास से जुड़े मुद्दों पर सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा.
राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान जैसे ही VB-G RAM G बिल का उल्लेख हुआ, विपक्षी सांसद अपनी सीटों से खड़े होकर नारेबाजी करने लगे. उनका कहना था कि यह विधेयक जनहित के खिलाफ है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए. कुछ देर तक लोकसभा कक्ष में शोरगुल का माहौल बना रहा, जिससे कार्यवाही प्रभावित हुई, हालांकि स्थिति जल्द ही नियंत्रित कर ली गई.
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि समानता और सामाजिक न्याय संविधान की आत्मा हैं. उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं. सरकार के तीसरे कार्यकाल में गरीबों और वंचित वर्गों को और सशक्त बनाने के प्रयास तेज किए गए हैं.
राष्ट्रपति ने भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की यात्रा ऐतिहासिक रही. उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में भारत अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. गगनयान मिशन को लेकर देश में उत्साह का माहौल है.
अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' की राह पर आगे बढ़ रही है. पुराने कानूनों को बदलकर भविष्य की जरूरतों के अनुसार नीतियां बनाई जा रही हैं. उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को रोजगार और विनिर्माण के लिए अहम बताया और कहा कि भ्रष्टाचार पर सख्ती से लगाम लगाई गई है.
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि माओवादी हिंसा अब सीमित इलाकों तक सिमट गई है और हजारों लोगों ने आत्मसमर्पण किया है. उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त नीति दोहराई. इससे पहले संसद परिसर में उनका भव्य स्वागत हुआ, जहां सेनगोल के साथ पारंपरिक समारोह ने बजट सत्र की शुरुआत को ऐतिहासिक बना दिया.