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दुश्मन न करे दोस्त ने वो काम किया, 1000 रुपये उधार मांगने पर डंडों से पीटकर कर दी हत्या, अब मिली उम्रकैद की सजा

कर्नाटक के चिक्कमगलुरु जिले से एक दिलदहला देने वाला मामला सामने आया था, जहां 1000 के मामूली विवाद को लेकर दोस्त ने दोस्त को मौत के घाट उतार दिया था. इस मामले में कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई.

Anuj
Edited By: Anuj
दुश्मन न करे दोस्त ने वो काम किया, 1000 रुपये उधार मांगने पर डंडों से पीटकर कर दी हत्या, अब मिली उम्रकैद की सजा
Courtesy: Chat GPT

चिक्कमगलुरु: कर्नाटक राज्य के चिक्कमगलुरु जिले से एक बड़ा मामला सामने आया है. हत्या के मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है. मामूली रकम को लेकर शुरू हुए विवाद में एक व्यक्ति को मौत के घाट उतार दिया गया था.

साल 2021 में हुई इस घटना ने इलाके को झकझोर दिया था. अब जिला एवं सत्र न्यायालय ने सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए सख्त सजा सुनाई है. 

1000 के विवाद में गई जान

यह मामला 27 जुलाई 2021 का है. मंजुनाथ और वेंकटचलपति अज्जमपुरा के एक होटल में साथ काम करते थे. मंजुनाथ ने वेंकटचलपति से अपने 1,000 रुपये वापस मांगे. इसी बात पर दोनों के बीच तीखी बहस हो गई. 

इलाके में दहशत का माहौल

हादसे के समय वेंकटचलपति एक कॉलेज के मैदान के थिएटर में सो रहा था, तभी रात करीब 11.30 बजे मंजुनाथ ने वेंकटचलपति पर डंडे से हमला कर दिया. इस हमले में वेंकटचलपति की दर्दनाक मौत हो गई. यह खबर बाहर आने पर इलाके में दहशत फैल गई. मंजुनाथ और वेंकटचलपति दोनों दोस्त बताए जा रहे हैं, जो एक होटल में मजदूरी का काम करते थे. 

कोर्ट ने सुनाई सजा

अज्जमपुरा पुलिस ने जांच कर मामला दर्ज किया और समय पर चार्जशीट दाखिल की. जिला एवं सत्र न्यायालय ने मंजुनाथ को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई. और साथ ही 10 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है. 

कोर्ट ने मिसाल कायम की 

मामूली रुपए या विवाद को लेकर ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिनपर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाने की आवश्यकता है. हालांकि, कोर्ट के फैसले ने यह साबित कर दिया कि गलत काम करने वाला कोई भी व्यक्ति कानून से बच नहीं सकता है. 

लोगों में गुस्सा क्यों बढ़ रहा?

आजकल उधारी को लेकर लोगों में गुस्सा इसलिए बढ़ रहा है, क्योंकि आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. महंगाई, कम आमदनी और नौकरी की अनिश्चितता ने लोगों की सहनशक्ति कम कर दी है. छोटी-छोटी रकम भी रिश्तों में तनाव पैदा कर रही है. पहले उधार को भरोसे और जरूरत से जोड़ा जाता था, लेकिन अब वही बात टकराव और हिंसा की वजह बनती जा रही है. ऐसे में संवाद, धैर्य और कानूनी समझ पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है, ताकि मामूली विवाद किसी बड़ी त्रासदी में न बदले.