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एक और भाजपा नेता की बेटी ने किया CJP आंदोलन का समर्थन, शिक्षा मंत्री पर भी साधा निशाना

भाजपा के पूर्व विधायक विक्रम सिंह की बेटी यशस्विनी राजे सिंह ने CJP के छात्र आंदोलन का समर्थन किया है. उन्होंने शिक्षा मंत्री के बदलाव और आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम पर अपनी राय रखते हुए कई राजनीतिक सवाल भी उठाए.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
एक और भाजपा नेता की बेटी ने किया CJP आंदोलन का समर्थन, शिक्षा मंत्री पर भी साधा निशाना
Courtesy: social media

NEET पेपर लीक विवाद को लेकर हुए CJP के छात्र आंदोलन के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं. इसी कड़ी में भाजपा के पूर्व विधायक विक्रम सिंह की बेटी यशस्विनी राजे सिंह ने आंदोलन का समर्थन करते हुए अपनी राय सार्वजनिक रूप से साझा की है.

यशस्विनी राजे सिंह ने खुलकर रखा पक्ष

कंटेंट क्रिएटर और भाजपा के पूर्व विधायक विक्रम सिंह की बेटी यशस्विनी राजे सिंह ने एक मीडिया बातचीत में कहा कि वह दिल्ली के जंतर-मंतर में हुए CJP के छात्र प्रदर्शन में शामिल हुई थीं. उन्होंने आंदोलन को छात्रों की आवाज बताया और कहा कि इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक राजनीतिक घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने नए शिक्षा मंत्री को लेकर भी अपनी टिप्पणी की और पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सवाल उठाए.

इस्तीफे और बयान पर जताई आपत्ति

यशस्विनी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को पश्चाताप के बजाय एक अलग राजनीतिक संदेश के रूप में पेश किया गया. उन्होंने इस्तीफा पत्र में 'राष्ट्रविरोधी ताकतों' वाले उल्लेख पर भी आपत्ति जताई और कहा कि ऐसे शब्द आंदोलन कर रहे छात्रों की भावना के अनुरूप नहीं हैं. उनके अनुसार, इस पूरे मुद्दे को संवेदनशीलता के साथ देखने की आवश्यकता है.

परिवार से अलग रखती हैं राजनीतिक विचार

यशस्विनी ने स्पष्ट किया कि उनके राजनीतिक विचार उनके परिवार से अलग हैं. उन्होंने कहा कि वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं, स्वतंत्र रूप से रहती हैं और लंबे समय से अपने गृह क्षेत्र नहीं गई हैं. उनका कहना है कि निजी और राजनीतिक जीवन को अलग रखने की वजह से वह बिना किसी दबाव के अपनी राय सार्वजनिक रूप से रख पाती हैं.

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

इससे पहले भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता और असम के मंत्री केशव महंता की बेटी दिबिसा महंता भी छात्र आंदोलन के समर्थन को लेकर चर्चा में रही थीं. दोनों के सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक मौजूदगी ने व्यापक बहस को जन्म दिया था. वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि वयस्क बच्चों के विचारों के लिए उनके माता-पिता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए.