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असम विधानसभा चुनाव: कांग्रेस ने जारी की 22 उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट, जानें किसकी लगी लॉटरी?

असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. इस बीच कांग्रेस ने उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट जारी कर दी है.

Anuj
Edited By: Anuj
असम विधानसभा चुनाव: कांग्रेस ने जारी की 22 उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट, जानें किसकी लगी लॉटरी?
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नई दिल्ली: असम विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज हो गई हैं. इसी कड़ी में कांग्रेस ने गुरुवार को उम्मीदवारों की तीसरी सूची जारी कर दी है. इस सूची में 22 प्रत्याशियों के नाम शामिल हैं. इसके साथ ही पार्टी अब तक कुल 87 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है, जिससे चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है.

इससे पहले कांग्रेस ने पहली सूची में 42 और दूसरी सूची में 23 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए थे. अब तीसरी सूची आने के बाद पार्टी ने अधिकांश सीटों पर अपने उम्मीदवार तय कर दिए हैं. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में बाकी बची सीटों पर भी उम्मीदवारों का ऐलान किया जा सकता है. 

राज्य की राजनीति में हलचल तेज

असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए नगांव से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई और असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष नवज्योति तालुकदार ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था. दोनों नेताओं का यह कदम चुनाव से कुछ दिन पहले सामने आया है, जिससे पार्टी पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है.

कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए

नवज्योति तालुकदार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भेजे अपने इस्तीफे में पार्टी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने लिखा कि लंबे समय से संगठन के भीतर समन्वय की कमी, निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव और उनकी शिकायतों पर ध्यान न दिए जाने के कारण उन्होंने यह फैसला लिया है. तालुकदार ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में पार्टी में बने रहना उनके लिए उचित नहीं है. 

संभावित उम्मीदवार को लेकर आपत्ति

वहीं, प्रद्युत बोरदोलोई ने भी अपने इस्तीफे में गहरा दुख जताते हुए कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता समेत सभी पदों से अलग होने की घोषणा की. उन्होंने हाल ही में पार्टी नेतृत्व को लिखे पत्र में लाहोरीघाट विधानसभा सीट के संभावित उम्मीदवार को लेकर आपत्ति जताई थी. बताया जा रहा है कि टिकट वितरण और उम्मीदवार चयन को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा था, जिसके चलते यह निर्णय सामने आया.