सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परीक्षा अनियमितताओं के मुद्दे पर सरकार से संवाद और जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की चिंताओं को गंभीरता से सुनना सरकार की जिम्मेदारी है. हजारे ने यह भी कहा कि यदि किसी मंत्री की जिम्मेदारी तय होती है तो उसका इस्तीफा सरकार को कमजोर नहीं बल्कि अधिक जवाबदेह और मजबूत बनाएगा.
अपने पत्र में अन्ना हजारे ने लिखा कि किसी मंत्री से इस्तीफा लेने का कदम पूरे मंत्रिमंडल के लिए एक स्पष्ट संदेश होगा कि विभागीय जिम्मेदारियों में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी. उनके अनुसार इससे शासन व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि जवाबदेही तय होने से प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार आएगा और जनता का भरोसा भी मजबूत होगा.
BREAKING 🚨
— Ashutosh (@thegeo_sync) July 22, 2026
Social activist Anna Hazare has written to Prime Minister Narendra Modi, expressing concern over the ongoing student movement.
He has also announced that he will observe a silent protest tomorrow in support of the issue. pic.twitter.com/xB865vYDyS
हजारे ने छात्रों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने वाले लोगों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग उचित नहीं माना जा सकता. सरकार को विरोध को कानून-व्यवस्था का मुद्दा बनाने के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान तलाशना चाहिए. उनका मानना है कि बातचीत से ही विश्वास का माहौल बन सकता है.
पत्र में अन्ना हजारे ने NEET परीक्षा का उल्लेख करते हुए कहा कि 2024 के बाद 2026 में भी प्रश्नपत्र लीक और गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं. उन्होंने परीक्षा रद्द होने के बाद 22 छात्रों की कथित आत्महत्याओं की खबरों पर भी चिंता व्यक्त की. हजारे ने कहा कि ऐसी घटनाएं शिक्षा व्यवस्था और प्रशासन दोनों के लिए गंभीर चेतावनी हैं तथा इनकी निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय की जानी चाहिए.
अन्ना हजारे ने अपने पत्र में यह भी कहा कि जब भी किसी घोटाले या अनियमितता का मामला सामने आता है तो अक्सर जिम्मेदारी निचले स्तर के अधिकारियों पर डाल दी जाती है, जबकि उपलब्धियों का श्रेय सरकार लेती है. उन्होंने आग्रह किया कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की बात धैर्यपूर्वक सुने, विश्वास बहाल करे और गांधीवादी सिद्धांतों तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप रचनात्मक संवाद के जरिए विवाद का समाधान निकाले. उन्होंने किसी मंत्री का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका पत्र ऐसे समय आया है जब परीक्षा अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज है.