नई दिल्ली: क्या आपने बाहुबली मूवी देखी है? अगर हां, तो प्रभास के किरदार की हिंदी डबिंग तो जरूर सुनी होगी. क्या आप जानते हैं कि वो आवाज किसकी है? बता दें कि बाहुबली मूवी में प्रभास के किरदान को हिंदी आवाज शरद केलकर ने दी है. ऐसे में सिर्फ एक्टिंग ही नहीं, बल्कि अपनी दमदार आवाज से दर्शकों के बीच खास उन्होंने अपनी पहचान बनाई है.
शरद केलकर ने अपनी करियर की शुरुआत टीवी से की. इसके बाद उन्होंने फिल्मों के साथ-साथ डबिंग की दुनिया में भी अपनी अलग पहचान बनाई. बता दें कि इनका जन्म 7 अक्टूबर 1976 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था. आज इनका जन्मदिन है. आज इनके जन्मदिन के मौके पर जानते हैं कि इनकी जिंदगी की कुछ अहम बातें.
शरद ने ग्वालियर से मार्केटिंग में MBA किया. उन्होंने फिजिकल एजुकेशन की पढ़ाई की. एक्टिंग में कदम रखने से पहले शरद ने जिम इंस्ट्रक्टर के तौर पर काम किया था. हालांकि, उनका सपना एक्टिंग में करियर बनाने का था.
शरद केलकर ने साल 2004 में टीवी शो आक्रोश से एक्टिंग की शुरुआत की. इस शो में उन्होंने इंस्पेक्टर सचिन कुलकर्णी का किरदार निभाया था.
इसके बाद वह सात फेरे: सलोनी का सफर, सिंदूर तेरे नाम का, उतरन और कुछ तो लोग कहेंगे जैसे लोकप्रिय टीवी शोज में नजर आए. इन सीरियल्स ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई.
टीवी के बाद शरद ने फिल्मों की तरफ रुख किया. उन्होंने साल 2004 में हलचल मूवी से डेब्यू किया. इसमें उनका किरदार छोटा रहा. इसके बाद उन्हें फिल्मों में काम मिलता गया. उन्होंने गोलियों की रासलीला: राम-लीला, तान्हाजी: द अनसंग वॉरियर और लक्ष्मी जैसी फिल्मों में काम किया. इसके अलावा वह मराठी और साउथ इंडियन फिल्मों में भी नजर आए.
शरद केलकर की आवाज उनकी सबसे बड़ी पहचान बनी. फिल्म बाहुबली के हिंदी वर्जन में उन्होंने प्रभास के किरदार को अपनी आवाज दी थी. उनकी आवाज को दर्शकों ने बेहद पसंद किया था. इसके अलावा उन्होंने गार्डियंस ऑफ द गैलेक्सी और XXX: रिटर्न ऑफ जेंडर केज जैसी हॉलीवुड फिल्मों के हिंदी डबिंग वर्जन में भी अपनी आवाज दी.
यह बहुत कम लोगों को पता है कि शरद केलकर को हकलाने की परेशानी थी. उन्होंने बचपन में स्पीच डिसऑर्डर का सामना किया था. एक इंटरव्यू में शरद ने बताया था कि एक्टिंग में आने से पहले तक वह हकलाते थे. लेकिन उन्होंने इस कमजोरी को अपने रास्ते की रुकावट नहीं बनने दिया. मेहनत और आत्मविश्वास के साथ उन्होंने अपनी आवाज को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया.
ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि आज शरद केलकर एक अभिनेता के साथ-साथ एक लोकप्रिय वॉइस आर्टिस्ट के तौर पर भी अपनी अलग पहचान रखते हैं. उनकी कहानी बताती है कि किसी कमजोरी को मेहनत और आत्मविश्वास से अपनी ताकत में बदला जा सकता है.