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Pankaj Udhas: 51रु ने बना दिया गजल सम्राट, जानें क्या है पंकज उधास का लता मंगेशकर कनेक्शन

Pankaj Udhas: पंकज उधास अपनी आसान गायकी, शायराना अंदाज़ और दिल को छू लेने वाली आवाज़ के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने आज अपनी आखिरी सांसे मुंबई में ली, जिसके बाद आइए एक नजर उनके जीवन और व्यक्तित्व के सफर पर भी डालते हैं जो कि उनकी गज़लों की तरह ही दिलचस्प है.

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India Daily Live

Pankaj Udhas: गजल की दुनिया के दिग्गज गायकों में शुमार पंकज उधास अब इस दुनिया में नहीं रहे. अपनी मखमली आवाज से गीतों में छिपी भावनाओं को जिंदा कर सुनने वाले के दिलों में एक अलग जगह बनाने वाले पंकज उधास ने अपनी आखिरी सांसे मुंबई में ली. इस दुखद घटना की जानकारी उनकी बेटी नायाब उधास ने दी. पंकज उधास की बात करें तो उनके सफर की शुरुआत गुजरात के जेतपुर के एक जमींदार परिवार में 17 मई 1951 को हुई थी. 

पंकज उधास अपने तीन भाइयों में सबसे छोटे थे और उनका घर म्यूजिक के सुरों से गूंजता था. उनके सबसे बड़े भाई, मनहर उधास, एक मशहूर थिएटर एक्टर और प्लेबैक सिंगर हैं, जबकि उनके दूसरे भाई, निर्मल उधास, एक प्रसिद्ध गजल गायक रहे हैं. घर में ही मिले इस संगीतमय माहौल ने पंकज को भी अपनी ओर खींचा और बहुत छोटी उम्र में ही उन्होंने अपने जुनून की खोज कर ली.

51 रु के इनाम ने बदली जिंदगी

ऐसा कहा जाता है कि पंकज उधास का म्यूजिक के साथ पहला आधिकारिक जुड़ाव 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान हुआ था. इस दौरान उन्होंने स्वर कोकिला लता मंगेशकर के गाने "ऐ मेरे वतन के लोगों" को गाया जिसे सुनकर न केवल उन्हें दर्शकों से प्यार मिला बल्कि इस दौरान उन्हें अपने जीवन का पहला 51 ₹ का इनाम भी मिला. यह इनाम भले ही देखने में छोटा महसूस होता हो लेकिन यह उनके जीवन का सबसे अहम मोड़ साबित हुआ और म्यूजिक को प्रोफेशन के रूप में अपनाने के लिए उन्हें हमेशा प्रेरित करती रहा.

कैसे शुरू हुआ फिल्मों में गाने का सफर

राजकोट की म्यूजिक नाट्य अकादमी में शुरुआती ट्रेनिंग लेने के बाद पंकज उधास ने मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से विज्ञान में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. म्यूजिक के प्रति उनकी आत्मीयता कभी कम नहीं हुई. मुंबई की हलचल ने उनके लिए म्यूजिक की दुनिया के नए रास्ते खोल दिए. यह इसी दौरान था कि उन्हें उषा खन्ना ने 1972 की फिल्म 'कामना' में अपना पहला बड़ा ब्रेक दिया, हालांकि फिल्म को ज्यादा सफलता नहीं मिली.

1980 के दशक की शुरुआत में, पंकज उधास का करियर अपने चरम पर पहुंच गया जब उन्होंने 1986 की मोस्ट क्रिटिक्ली एक्लेमड फिल्म 'नाम' में गाना गाया.  लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के म्यूजिक और आनंद बख्शी के गीतों के साथ उधास जी की आवाज जादू बन गई. हर भारतीय के दिल को छूने वाला गाना "चिट्ठी आई है" आज के दौर में भी किसी कालजयी क्लासिक की तरह सबसे अलग रखता है और विदेश में रहने वाले हर भारतीय के दिल की दास्तां कहता है.

संगीत के अलावा इन चीजों में भी माहिर थे पंकज उधास

म्यूजिक के अलावा, पंकज उधास शतरंज में भी माहिर खिलाड़ी थे और क्रिकेट उनका दूसरा प्यार था. वह एक्टिंग में भी हाथ आजमा चुके हैं. उन्होंने फिल्म "सौदागर" का प्रोडक्शन भी किया था. पंकज उधास सिगरेट के विज्ञापन में अभिनय करने के लिए एक करोड़ रुपये की पेशकश को अस्वीकार करने वाले पहले भारतीय गायक थे. पंकज उधास को म्यूजिक में उनके अतुलनीय योगदान के लिए साल 2006 में भारत सरकार की ओर से प्रतिष्ठित 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया था.

म्यूजिक के रत्नों के साथ किया काम

इसके बाद पंकज उधास के सफर ने रुकने का नाम नहीं लिया और  'साजन', 'ये दिल्लगी', और 'फिर तेरी कहानी याद आई' जैसी फिल्मों में उनके गाए गीत भी लोगों को खूब पसंद आए. पंकज उधास ने अपने म्यूजिक की यात्रा को आगे बढ़ाया जिसमें न केवल फिल्मी गाने बल्कि कई ग़जल एल्बम भी शामिल थे. "आहट", "मुख़्तसर", "नयाब", और "आफरीन" जैसे कलेक्शंस उनके म्यूजिक सम्राट होने का सबूत पेश करते हैं.

पंकज उधास ने  लता मंगेशकर, जगजीत सिंह और तलत अजीज सहित कई महान कलाकारों के साथ भी काम किया. उनकी आकर्षक आवाज ने उन्हें वैश्विक मंचों तक पहुंचाया, जहां उन्होंने वेम्बली एरिना और रॉयल अल्बर्ट हॉल जैसे मशहूर स्थानों पर परफॉर्म किया.

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