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Modi ka Parivar पर रार: उत्तराखंड में क्या BJP क्या Congress दोनों दलों में परिवारवाद का बोलबाला; यहां देखें फैमिली ट्री

Modi ka Parivar: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग में एक रैली को संबोधित करते हुए राजनीति में परिवारवाद पर हमला बोला. पीएम ने राहुल गांधी को राजकुमार कह कर तंज किया.

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Pankaj Soni

Modi ka Parivar :  चुनावों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मंगलवार को उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग में एक रैली को संबोधित किया. पीएम मोदी ने विकास की बात करने के साथ राजनीति में वंशवाद और परिवारवाद पर हमला बोला. मोदी ने राहुल गांधी को कांग्रेस का राजकुमार बताया और कांग्रेस में इस परिवार का कब्जा बताया. आज हम आपको 'मोदी का परिवार' सीरीज में उत्तराखंड में सभी राजनीतिक दलों में परिवारवाद के बारे में बताने जा रहे हैं.

हालांकि राजनीति में परिवारवाद देश की पुरानी समस्याओं में से एक है. उत्तराखंड की राजनीति में फैलते परिवारवाद पर नजर डालें तो इसमें भाजपा और कांग्रेस दोनों में से कोई भी पीछे नहीं है. 

हरीश रावत -आनंद रावत

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने परिवार के अधिकतम लोगों को राजनीति में सेट कर दिया है. हरीश रावत 1984 में, 1989 में, 1991 में, 1996 में, 1998 में और साल 1999 में सांसद प्रत्याशी बने. शुरू के तीन बार को छोड़कर बाद के चारों चुनाव जीते. 2000 में उत्तराखंड का गठन हुआ और हरीश रावत नए प्रदेश उत्तराखंड में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बन गए. 2002 में कांग्रेस ने हरीश रावत को राज्यसभा भेज दिया. 2004 में हरीश रावत ने पत्नी रेणुका रावत को अल्मोड़ा से सांसद प्रत्याशी बनाया लेकिन वो हार गईं. 2012 में अपने पुत्र आनंद रावत को युवा कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया. 

2022 में हरीश रावत ने अपने पुत्र वीरेंद्र रावत को हैरतअंगेज तरीके से कांग्रेस का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया था. 2019 में पुत्री अनुपमा रावत को महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय महामंत्री बना चुके थे. हरीश रावत ने अपने साले पूरन सिंह माहरा को साल 1980, 1985, 1989, 1991 और 2002 में रानीखेत से 5 बार विधायक प्रत्याशी बनाया जो केवल 1 बार जीते और बाकी सब चुनाव में हार गए. इसके बाद साल 2007, 2012, 2017 और 2022 चार बार हरीश रावत के दूसरे साले करन माहरा को रानीखेत से विधायक प्रत्याशी बनाया गया. 

इंदिरा हृदयेश - सुमित हृदयेश 

कांग्रेस में इंदिरा हृदयेश के पुत्र सुमित हृदयेश, शूरवीर सजवाण की पत्नी ने पंचायत चुनाव लड़ा. वहीं पुत्रवधू को ब्लॉक प्रमुख बनाया. इनके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह की राजनीति उनकी कई पीढ़ियों से चली आ रही है. प्रीतम सिंह के पिता उसके बाद प्रीतम सिंह और फिर उनके भाई और परिवार के लोगों ने भी चुनाव लड़े. इसके अलावा यशपाल आर्य, हरक सिंह रावत सहित कांग्रेस के तमाम ऐसे नेता हैं, जिन्होंने अपने परिवार के लोगों को राजनीति में लॉन्च किया.

बीजेपी में भी परिवारवाद की लंबी लिस्ट है

अगर उत्तराखंड में बीजेपी की बात करें तो दूसरी पीढ़ी को सेट करने का काम भाजपा के नेताओं ने भी खूब किया है. हालांकि हरीश रावत जैसा कोई बड़ा उदाहरण नहीं है, लेकिन भाजपा में कई ऐसे नेता हैं, जिन्होंने अपने परिवार के लोगों को राजनीति में उतारा है.

विजय बहुगुणा- सौरभ बहुगुणा 

विजय बहुगुणा के पुत्र सौरभ बहुगुणा, स्वर्गीय भाजपा नेता प्रकाश पंत की पत्नी चंद्र पंत, भाजपा विधायक सुरेंद्र जीना के भाई महेश जीना, पूर्व सांसद मानवेंद्र शाह की पुत्र वधु माला राज्य लक्ष्मी, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की बेटी नेहा जोशी, हरबंस कपूर की पत्नी सविता कपूर, बंशीधर भगत के पुत्र विकास भगत, चंदन रामदास की पत्नी पार्वती दास हैं.

उत्तराखंड में मगनलाल शाह की पत्नी को भारतीय जनता पार्टी ने थराली उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया था. जो कि उत्तराखंड विधानसभा में चुनाव जीतकर पहुंचीं थीं. वहीं प्रकाश पंत की पत्नी चंद्र पंत को भी पार्टी ने उपचुनाव में प्रत्याशी बनाया जो  विधानसभा पहुंचीं.

मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी-पुत्री रितु खंडूरी

सुरेंद्र सिंह जीना के भाई महेश जिन को भी उपचुनाव में पार्टी ने प्रत्याशी बनाया जो चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं. साल 2022 में भी चुनाव में जीते. हरबंस कपूर की पत्नी को भी पार्टी ने 2022 की विधानसभा चुनाव में टिकट दिया वो भी कैंट विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं. इतना ही नहीं कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के पुत्र तो पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी की पुत्री रितु खंडूरी विधानसभा अध्यक्ष बनीं. 

परिवारवाद की राजनीति पर क्या चल रहा है?

परिवारवाद के मामले में भाजपा और कांग्रेस के नेता एक दूसरे पर कीचड़ उछालने का काम करते हैं, लेकिन दोनों ही दलों में एक जैसी स्थिति है. सच यह भी है कि बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए 'मोदी का परिवार' नाम से एक मुहिम शुरू कर रखी है. जिसको प्रसांगिक बनाए रखने के लिए पीएम मोदी परिवारवाद की राजनीति को लेकर हमलावर रहते हैं. बीजेपी को इस मुहिम से 2024 में लाभ की उम्मीद है.

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