8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें बढ़ी हुई हैं. आयोग को रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय मिला है. अगर रिपोर्ट या लागू होने में देरी होती है, तो पिछली अवधि का एरियर कर्मचारियों के लिए बड़ी रकम बन सकता है. हालांकि ये आंकड़े अनुमान आधारित हैं.
8वें वेतन आयोग को नवंबर 2025 में जारी किए गए नियमों के तहत अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है. इस हिसाब से आयोग मई 2027 तक अपनी रिपोर्ट दे सकता है. अगर समयसीमा बढ़ती है या वेतन संशोधन लागू होने में और वक्त लगता है, तो कर्मचारियों को पिछली अवधि का बकाया मिलने की संभावना बन सकती है. हालांकि अंतिम राशि सरकार के फैसले और लागू तारीख पर निर्भर करेगी.
लेवल-6 के कर्मचारियों के लिए मौजूदा न्यूनतम बेसिक वेतन 35,400 रुपये माना गया है. यदि 2.1 के फिटमेंट फैक्टर और 18 महीने की देरी का अनुमान लगाया जाए, तो करीब 7,00,920 रुपये का बकाया बन सकता है. वहीं 2.28 फिटमेंट फैक्टर और 24 महीने की अवधि पर यह राशि करीब 10,87,488 रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. 2.57 फैक्टर पर यही रकम करीब 13.34 लाख रुपये हो सकती है.
लेवल-8 के कर्मचारियों के लिए भी देरी की अवधि और फिटमेंट फैक्टर के आधार पर बकाया राशि अलग-अलग होगी. दिए गए अनुमान के मुताबिक 2.15 फिटमेंट फैक्टर और 24 महीने की देरी पर करीब 13.14 लाख रुपये का एरियर बन सकता है. 2.28 फैक्टर पर यह राशि करीब 14.62 लाख रुपये और 2.57 फैक्टर पर करीब 17.94 लाख रुपये तक पहुंच सकती है.
यहां सबसे अहम भूमिका फिटमेंट फैक्टर की होगी. इसी के आधार पर मौजूदा बेसिक वेतन को संशोधित करने का अनुमान लगाया जाता है और फिर बकाया अवधि के हिसाब से रकम निकाली जाती है. इसलिए 18 लाख रुपये का आंकड़ा किसी तय भुगतान की गारंटी नहीं है. आयोग की अंतिम सिफारिश, सरकार की मंजूरी, प्रभावी तारीख और वास्तविक फिटमेंट फैक्टर तय होने के बाद ही कर्मचारियों के एरियर की सही रकम स्पष्ट होगी.